मधेपुरा :  उदाकिशुनगंज में सीएए, एनआरसी, एनपीआर के विरोध में बना मानव श्रृंखला, लगी लंबी कतारें

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कौनैन बशीर
वरीय उप संपादक

मधेपुरा/बिहार : सीएए, एनआरसी और एनपीआर के विरोध में लेफ्ट और सहयोगी पार्टियां सहित इमारत-ए-शरिया  फुलवारी शरीफ, पटना के आह्वान पर उदाकिशुनगंज में बनी मानव श्रंखला में आम अवाम ने काफी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया।

इस दौरान मानव श्रृंखला में शामिल सभी समुदाय के लोगों  ने सीएए, एनआरसी, एनआरपी का जमकर विरोध किया गया। प्रखंड के बड़ाटेनी से थाना चौक तक लगाये गए मानव श्रृंखला में महिलाएं पुरुष अपने-अपने हाथों में रिजेक्ट सीएए, एनआरसी, एनपीआर लिखी तख्ती को लेकर सड़क पर कतारबद्ध होकर अनोखा प्रदर्शन किया गया, तो वहीं छात्र -छात्राओं ने कागज से बनी टोपी पर बायकाट एनआरसी, सीएए, एनपीआर लिख सर पर पहन विरोध प्रदर्शन किया। विशेष तौर पर महिलाओं ने इस को लेकर सरकार पर हमला बोला और कहा कि जिस तरह पर्यावरण संरक्षण जरूरी है ठीक उसी तरह देश के  सभी नागरिक की सुरक्षा और उसका सम्मान जरूरी है। हम काले कानून सीएए, एनआरसी व एनआरपी का पुरजोर विरोध करते हैं।

वही सीपीआई के अंचल मंत्री उमाकांत सिंह ने कहा कि सीएम नीतीश कुमार एनआरसी के खिलाफ हैं और सीएए का समर्थन कर रहे हैं और एनपीआर पर उन्होंने चुप्पी साध रखी है। बिहार की जनता उनसे जवाब चाहती है कि आखिर उन्होंने संसद में सीएए का समर्थन क्यों किया? मानव श्रृंखला मे राजद, कोंग्रेस, हम आदि के कार्यकर्ताओं ने भी सड़क पर उतर कर एनआरसी व सीएए के विरोध मे मानव शृंखला मे चढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया जिसको लेकर सुबह से सड़कों पर महिलाओं का हुजूम लगने लगा। प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गांव से आयी महिलाओं का जत्था सबसे पहले फुलौत चौक में पहुंचा। जहां से महिलाओं का एक जत्था राहठा चौक की ओर तो दूसरा जत्था चौसा चौक की ओर मानव शृंखला बना रही थी।

सर्वविदित है कि इस काले कानून के विरोध में पूरे देश में जन आंदोलन व्यापक रूप धारण करण कर लिया है और इसकी गूँज अब गाँव गाँव तक पहूँच चूकी है। मानवश्रृंख्ला में आए लोगों का यह भी कहना था कि वह संविधान के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे। बुजुर्ग प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कैसा समय आ गया है कि अब अपने ही देश में अपनी नागरिकता साबित करने के लिए लाईनों में खड़ा होना पड़ेगा और प्रमाण दिखा कर अपनी नागरिकता साबित करनी पड़ेगी। छात्र व युवाओं की माँग थी कि देश के बुनियादी मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए हमें इन मुद्दों में उलझाया जा रहा है। एनपीआर और एनआरसी से समाज के हर वर्ग प्रभावित होंग तथा दलित, पिछड़े, आदिवासियों अल्पसंख्यक और आर्थिक रूप कमजोर लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। 

मानव श्रृंख्ला में खड़े लोगों ने अपने हाथों में “संविधान बचाओ- देश बचाओ”  “हम हैं भारत” , “हमभारत के लोग- सीएए, एनपीआर, एनआरसी हमें स्वीकार नहीं” , “प्यार बाँटो देश नहीं”,”नो सीएए नो एनपीआर, नो एनआरसी हमें मंजूर नहीं” सभी का खून शामिल है यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़े है” सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्तां हमारा हम बुलबुले हैं इसकी यह गुलसितां हमारा,” जैसे स्लोगन लिखे प्लेकार्ड हाथों में रखे हुए थे।

इधर विशेष मानव शृंखला को देखते हुए प्रशासन की ओर से बेहद सख्त प्रबंध किये गए थे। सुरक्षा को देखते हुए विभिन्न चौक चौराहे पर अतिरिक्त पुलिस बल को तैनात किये हुए थे। एनआरसी व सीएए का विरोध कर पूर्व प्रमुख मुख्तार आलम ने बताया कि संविधान के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। एनआरसी सीएए देश के 70 प्रतिशत गरीब-दलित व मुस्लिम के साथ धोखा है। सरकार रोजगार विकास की बातें नहीं करता महंगाई और रोजी-रोटी के लिए काम नहीं करती बल्कि हिन्दू-मुस्लिम में उछाल कर नाकामी छिपाने में लगी है। वही मौके पर मुखिया अब्दुल अहद, पूर्व प्रमुख विकाशचंद्र यादव,रमण यादव, मोहम्मद सूरज, बिहार यूथ आर्गेनाइजेशन के सदस्य मंजर आलम, इमारत ए शरिया बिहार के नकीब मौलाना अब्दुल जलील कासमी, निसार आलम, मो०इसराफिल, अकरम अंसारी, अब्दुल कुद्दूस, ऐनुल अंसारी, हाफिज फैयाज, अमीर उद्दीन, समरूल हक, असमत अंसारी, नजाम रैन, मनीर रैन, इलियास रैन, हीरा अंसारी, हलधर शर्मा, फिरोज आलम, मोहम्मद मिरजान आलम, मोहम्मद सुलेमान, मोती सिंह, सचिदानंद शर्मा, अनिल पासवान, मोहम्मद चाँद, गायत्री देवी, शबनम खातून, पूर्व मुखिया सिकंदर अंसारी, मोहम्मद निसार आलम सहित हजारों लोग शामिल थे।


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