आज मौलाना अबुल कलाम आजाद के विचारों को फैलाने की ज़रूरत – इमारत शरिया

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देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के जन्म दिवस के अवसर पर इमारत शरिया में कान्फ्रेंस का आयोजन

प्रेस विज्ञप्ति

फुलवारी शरीफ/पटना/बिहार : महान स्वतन्त्रता सेनानी एवं देश के पहले शिक्षा मंत्री इमामुल हिन्द, भारत रत्न मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के जन्म दिवस पर अमीरे शरियत मौलाना मोहम्मद वली रहमानी साहब के निर्देश पर कार्यवाहक  सचिव मौलाना शिबली दृअल कासमी की अध्यक्षता में मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के जीवन एवं उन के कारनामों पर एक दिवसीय कान्फ्रेंस का आयोजन किया गया ।

ज्ञात हो की मौलाना अबुल कलाम आजाद का पूरा नाम अबुल कलाम गुलाम मुहियुद्दीन था। आप 11 नवंबर 1888 ई0 को मक्का में पैदा हुए थे एवं 22 फरवरी 1958ई0 को आप का देहांत हुआ। आप एक प्रसिद्ध विद्वान थे। वे कविए लेखक, पत्रकार और भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे। भारत की आजादी के बाद वे एक महत्त्वपूर्ण राजनीतिक पद पर रहे एवं भारत के पहले शिक्षा  मंत्री के तौर पर आप ने देश को आई आई टी ए आई आई एम ए साहित्य एकेडमी, ललित कला एकेडमी, संगीत नाटक एकेडमी,  आई सी सी आर, यू जी सी  जैसे अहम शैक्षिक एवं साहित्यिक संस्थान दिए। यही वजह है कि उन के जन्म दिवस 11 नवंबर को  शिक्षा दिवस के रूप में पूरे देश में मनाया जाता है । मौलाना आज़ाद हिन्दू मुस्लिम एकता के बहुत बड़े प्रचारक थे उन्होंने ग्यारह वर्षों तक राष्ट्र की शिक्षा नीति का मार्गदर्शन किया। उन्होंने शिक्षा और संस्कृति को विकसित करने के लिए उत्कृष्ट संस्थानों की स्थापना की ।

केंद्रीय सलाहकार शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष होने पर सरकार से केंद्र और राज्यों दोनों के अतिरिक्त विश्वविद्यालयों में सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षाए 14 वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षाए कन्याओं की शिक्षाए व्यावसायिक प्रशिक्षणए कृषि शिक्षा और तकनीकी शिक्षा जैसे सुधारों की वकालत की। उन्हे वर्ष 1992 में मरणोपरान्त देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान  भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

मौलाना आज़ाद के जीवन पर आयोजित कान्फ्रेंस में अपने विचारों को व्यक्त करते हुए कान्फ्रेंस के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद शिबली अल कासमी कार्यवाहक सचिव इमारत शरिया  ने कहा कि मौलाना आज़ाद ने पूरा जीवन हिन्दू मुस्लिम एकता  एवं एक संयुक्त राष्ट्र  के निर्माण के प्रयास में लगा दिए, हिन्दू मुस्लिम एकता के वह इस सदी के सब से बड़े प्रचारक थे। उन्होंने ने कहा था कि अगर आसमान से कोई फरिश्ता उतार आए और  कुतुब मीनार से  कहे कि मैं इस देश को आज़ाद कर दूंगा मगर उस की कीमत यह चुकानी होगी कि उस के बदले में हिन्दु मुस्लिम की  सद्भावना समाप्त हो तो मैं ऐसी आज़ादी को कदापि कबूल नहीं करूंगा ।

मौलाना ने कहा कि मौलाना आज़ाद ने जो विचार पेश किए हैं आज के दौर में उस की बहुत ज़रूरत है । जब कि समाज में हर ओर  आपसी नफरत, मतभेद एवं गलत फहमी फैल रही है। ऐसे हालात में हम मौलाना आज़ाद के विचारों पर अमल कर के देश को मोहब्बत, भाईचारे, एकता का पैगाम दे सकते हैं एवं पूरे देश को एक धागे में पिरो सकते हैं । उन्होंने कहा कि इमारत शरिया की स्थापना में भी मौलाना आज़ाद का बड़ा रोल रहा है एवं इमारत की स्थापना के लिए होने वाली इजलास की अध्यक्षता भी मौलाना आजाद ही ने की थी । उन्होंने कहा कि इमारत शरिया ने मौलाना आज़ाद के विचारों को हमेशा ही धरातल पर उतारने की कोशिश की है । उन्होंने कहा कि आज शिक्षा दिवस के अवसर पर हम पूरे देश को शिक्षा के मैदान में आगे बढ्ने एवं हर बच्चे को शिक्षित बनाने की प्रतीबद्धता का पैगाम देते हैं ।

ऑल इंडिया मुस्लिम प्रसनल लॉ बोर्ड के सेक्रेटरी एवं प्रसिद्ध विद्वान मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा कि मौलाना आज़ाद के विचारों को हम एक शब्द में व्यक्त करना चाहें तो हम कह सकते हैं कौमी इत्तेहाद, (राष्ट्रीय एकता) उन्हों ने मुस्लिम एवं गैर मुस्लिम को एकजुट करने में अंत तक प्रयास किए । आज के दौर में राष्ट्र के संबंध में उन के विचारों को फैलाने की बहुत आवश्यकता है,  कुरान एवं हदीस की रौशनी में जिस ताकत के साथ आप ने राष्ट्रीय एकता की बात कही, पूरी शताब्दी में किसी ने भी इतनी मजबूती से यह बात नहीं कही है ।

जमीयत उलमा बिहार के महासचिव  मौलाना हुस्न अहमद कादरी, माइनोरिटी कमीशन के चेयरमैन प्रोफेसर युनूस हकीम,  सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन मोहम्मद इर्शादुल्लाह, मदरसा शमसूल होदा पटना के प्राचार्य मौलाना मशहूद अहमद कादरी, पूर्व प्राचार्य मौलाना अबुल कलाम कासमी,  रिटायर्ड डिप्टी लेबर कमिश्नर हजारी बाग एवं मौलाना आज़ाद स्टडी सर्किल रांची के अध्यक्ष शाहनवाज़ अहमद खान, सुबाई जमीयत अहले हदीस  के अध्यक्ष  मौलाना खुर्शीद मदनी, शिया विद्वान मौलाना अमानत हुसैन, प्रसिद्ध शिक्षाविद एवं स्तंभकार प्रो0 महमूद नोहसवी, इमारत शरिया के उप सचिव मौलाना सोहैल अहमद नदवी, नजम मिशन फुलवारी शरीफ के डायरेक्टर नजमूल हसन नजमी, प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन मौलाना शबबीर अहमद कासमी मोहतमीम मदरसा इसलामिया शकपूर भरवारा, पूर्व असिस्टेंट डायरेक्टर खुदा बख्श लाइब्रेरी डा0 अतिकुर रहमान, प्रसिद्ध पत्रकार एवं शिक्षाविद अज़ीमुद्दीन अंसारी, जमाअत इस्लामी के अमीर-ए-हल्का बिहार  मौलाना रिजवान अहमद इसलाही, इमारत शरिया के सहायक सचिव मौलाना अहमद हुसैन कासमी और अनवारुल होदा  ने भी अपने अपने विचारों को रखा एवं मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के जीवन के विभिन्न बिन्दुओं पर प्रकाश डाला ।

इन लोगों के वक्तव्य में मौलाना आज़ाद के विचार, राष्ट्रीय एकता, शिक्षा मंत्री के तौर पर आप के द्वारा किए गए कार्यों ए इमारत शरिया से संबंध एवं इमारत शरिया की स्थापना में उन के रोल, उन के शैक्षिक सिद्धांतों ए अंजुमन इसलामिया रांची एवं मदरसा इसलामिया रांची की स्थापना, आप की लिखी गई किताबों, समाचार पत्र की इदारत के हवाले से व्याख्यान किया गया ।

इस अवसर पर मौलाना आज़ाद के ऊपर लिखी गई दो किताबों अमीरे-ए-शरियत मौलाना मोहम्मद वली रहमानी की लिखी हुई “इमामूल हिन्द मौलाना अबुल्कलाम आज़ाद कई दिमागों का एक इंसान” और दूसरी किताब नसीमा खातून रिसर्च स्कॉलर रांची यूनिवर्सिटी की लिखी हुई किताब “मौलाना आजाद, कौमियत एवं मजहबी मुनाफरत” (यह किताब इन्हों ने मौलाना आज़ाद स्टडी सर्किल की निगरानी में लिखी है) का विमोचन भी उलमा-ए- किराम एवं बुद्दिजीवओं के हाथों हुआ।

इस कॉन्फ्रेंस का मंच संचालन मौलाना मुफ़्ती वसी अहमद कासमी नायब काज़ी इमारत शरिया ने किया।  मौलाना शमीम अकरम रहमानी सहायक काज़ी इमारत शरिया ने मौलाना आज़ाद के ऊपर एक नज़्म भी पढ़ी । आखिर में काज़ी अब्दुल जलील कासमी की दुआ पर कान्फ्रेंस समाप्त हुआ । 

इस कान्फ्रेंस को कामयाब बनाने में मौलाना सोहैल अख्तर कासमी, कन्वेनर कान्फ्रेंस, जनाब समिउल हक,  मौलाना अर्शद रहमानी, मौलाना रिजवान अहमद नदवी, मौलाना मिनहाज आलम, मौलाना राशिदुल उजैरी, मौलाना साजिद रहमानी, मुफ्ती सईदुर रहमान, मुफ़्ती एहतेकामूल हकए काज़ी अंजार आलम कासमी, मौलाना मुफ़्ती मुरसल, मौलाना मोजिबूर रहमान, मौलाना मोतिउर रहमान, कमर अनीस कासमी,   मौलाना मोहम्मद अहमद इत्यादि ने बहुत मेहनत की।         


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