बिहार : हजरत मखदूमें जहां की पुरी जिंदगी एक नजर में

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मो0 मुर्शीद आलम
ब्यूरो, नालंदा

नालंदा/बिहार : जिले के बिहार शरीफ स्थित बड़ी दरगाह में हजरत मखदूम उल मुल्क शेख सर्फ उद्दीन अहमद यहीया मनेरी रहमतुल्लाह अलैहि का आस्ताने मुबारक है। इनके पिता का नाम हजरत मखदूम शेख कमाल उद्दीन यहीया मनेरी रहमतुल्लाह अलैहि थे।

इनका जन्म 661 हिजरी यानी 1263 ईसवी में हुई थी। इनके उस्ताद का नाम हजरत अल्लामा सर्फ उद्दीन अबुल अबोलोबामा था, हजरत मखदूम में जहां के चार भाई थे, सबसे बड़े हजरत मखदूम शेख जलील उद्दीन रहमतुल्लाही थे, जबकि मंजहले हजरत मखदूम जहां शेख सर्फ उद्दीन रहमतुल्ला अलैहि थे हजरत मखदूम खलील उद्दीन रहमतुल्ला अलेह और हजरत मखदूम शेख हबीब उद्दीन रहमतुल्लाही थे। हजरत मखदूम ए जहां की शादी उनके उस्ताद की साहेबजादे बीवी बहुबादाम से हुई थी। उनसे हजरत मखदूम जहां को एक औलाद पैदा हुई था जिसका नाम हजरत मखदूम जाकि फ़िरदौसी रहमतुल्लाह था। जिन का आस्ताना पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित है।

हजरत मखदूम जहां ने 36 साल बेहिया (भोजपुर जिला) और राजगीर (नालंदा जिला) के जंगल में तपस्या (एबादत)की थी। फिलहाल स्थान खानकाह फिरदौसीया बिहारशरीफ था। खानकाह की तामीर (निर्माण) बादशाह तुगलक ने 742 हिजरी में शुरू हुआ जो 752 में जाकर मुकम्मल हुआ। हजरत मखदूम जहां का आस्ताना नालंदा जिले के बिहार शरीफ के बड़ी दरगाह में स्थित है। हजरत मखदूम जहां का देहांत (वेशाल) 782 हिजरी यानी 1380 ईस्वी को 121 साल की उम्र में हुई। इनके आस्ताने की तामीर हजरत सैयद इब्राहिम उर्फ मलिक बया रहमतुल्लाह अलेह के पोते हजरत मलिक दाऊद ने 792 हिजरी को चबूतरे की तामीर (निर्माण) कराई। बादशाह सुलेमान केरला ने 977 हिजरी यानी 1570 ईस्वी को और बादशाह शाहजहां ने मखदूम तालाब 256 हिजरी यानी 1647 ईस्वी को तामीर (निर्माण) कराई थी।

इस तरह हजरत मखदूम मुल्क शैख सरफुद्दीन अहमद यहीया मनेरी रहमतुल्ला अलैहि की पुरी जिंदगी सादगी भरी इस दुनिया में गुज़र बसर कर पूरे आलम (दुनिया)को शांति भाईचारा का पैगाम (संदेश) दिया।


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