मधेपुरा/बिहार : बुधवार को भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय परिसर में यूजीसी नियम के समर्थन में बड़ी संख्या में छात्रों और नौजवानों का जुटान हुआ, जहां से छात्र और नौजवानों का हुजूम यूजीसी नियम के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद करते हुए कॉलेज चौक होते हुए कला भवन परिसर तक पहुंचा और सभी ने एक स्वर में यूजीसी नियम को सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में सख्ती के साथ लागू करने की मांग की।
इस दौरान प्रदर्शनकारी छात्र और युवाओं ने कहा कि आज उच्च शिक्षण संस्थानों में पिछड़े, दलित, आदिवासी वर्ग के छात्रों के साथ जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न हो रहा है। यूजीसी का आंकड़ा बता रहा है कि बीते 5 वर्षों में इस तरह के घटनाओं का आंकड़ा 118 प्रतिशत बढ़ गया है । ऐसे में देश के वंचित, पिछड़े, दलित और आदिवासी छात्र उच्च शिक्षण संस्थानों में सुरक्षित नहीं है । उन्होंने कहा कि रोहित वेमुला और पायल तनवी जैसे होनहार छात्रों का उत्पीड़न से तंग आकर आत्महत्या करना उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न का सबूत है । यूजीसी नियम इस तरह के कृत्य पर विराम लगाएगी और वंचित वर्ग के बच्चों को जातिवादी तत्वों से सुरक्षा प्रदान करेगी । ऐसे में सर्वोच्च्य न्यायालय द्वारा इस पर रोक लगाया जाना चिंताजनक है । प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हमलोग मांग करते है कि यूजीसी नियम को सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में सख्ती के साथ लागू किया जाए।
मार्च में मुख्यरूप से युवा नेता निशांत यादव, निखिल यादव, वसीमुद्दीन उर्फ नन्हे, कृष्णा कुमार, पावेल कुमार, रौशन कुमार बिट्टू, शुभम स्टालिन, सुशील कुमार, मो अबुजर, राहुल पासवान, अनिल कुमार, रमन कुमार, जितेंद्र कुमार, सोनू कुमार, अमरेश कुमार, विभाष कुमार विमल, सोनू सूद, शिवशंकर कुमार, प्रियांशु राज, आनंद शंकर, रणधीर कुमार, अमरजीत कुमार, मिथुन कुमार, प्रभात, कुंदन कुमार, राज कुमार समेत सैकड़ों छात्र और युवा मौजूद थे।

