लोक आस्था का प्रतीक है नारांव का सूर्य मंदिर, चैत व कार्तिक में छठ व्रतियों की होती है भारी भीड़

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अनुप ना. सिंह
स्थानीय संपादक

कोठिया नरावं सारण में स्थित सूर्य मंदिर उत्तर बिहार का प्रसिद्ध सूर्य मंदिर न सिर्फ श्रद्धालुओ व भक्तो के लिए प्रसिद्ध है बल्कि यह पर्यटको को भी आकर्षित करने वाला जगह है। चैत्र व कार्तिक छठ पर्व के दिन यहा आस्था का जन शैलाब उमरता है। इस दिन यहा का रौनक सबको मन भाता है।

यहा मन्दिर के चारो तरफ वृक्ष अच्छादित है जो मंदिर की खुबसूरती में चार चन्द लगाता है। मन्दिर परिसर के बीचो बीच बना वृहद जल कुण्ड के चारो तरफ से पक्का घाट है जहा एक साथ 500 से अधिक छठ व्रती सूर्य अध्र्य अर्पित करते है। भक्तो की माने तो वे कहते है जो भी निष्ठा के साथ सूर्य मन्दिर पर छठ व्रत करता है उसकी सभी मनोकामनाए पूर्ण होती है। ऐसा भी कहा जाता है कि जिसको चर्म रोग हो वह नियमित रूप से प्रत्येक रविवार को सूर्य कुण्ड मं स्नान कर भगवान सूर्य का पूजा करे तो राहत मिलती है। सूर्य कुण्ड के ठिक उत्तर मे वृहद धर्मशाला बना है जहा दूर दराज से आये छठ व्रती ठहरते है। सूर्य कुण्ड के चारो तरफ वृहद परिसर है जहा छठ व्रति बैठ पूजन करते है और जल कुण्ड में अर्पित करें है।

सूर्य मंदिर से सटे उत्तर मे अति प्राचीन राम जानकी मंदिर व शिवालय है। जिसकी प्राचीनता कोई नही बताता। यद्यपि सूर्य मंदिर का निर्माण बीसवीं सदी के उत्रार्ध में हुआ लेकिन सूर्य कुण्ड(पोखरा) भी प्राचीन है सूर्य मन्दिर निर्माण के समय इसका पुनः उद्धार हुआ और चारो तरफ बौण्ड्री व पक्का घाट का निर्माण कराया गया छपरा-पटना मुख्य सडक मार्ग पर अवतारनगर थाना से एक किमी पश्चिम मुस्सेपुर मे लाखो रूपये के लागत से भव्य सूर्य मन्दिर प्रवेश द्वार बना है। सूर्य मन्दिर के दक्षिण मे बना यज्ञ मंडप है जहा नौ कुण्ड व पाच पक्की वेदी बने है जहा हर 2-4 साल के बाद बड़ा यज्ञ होता है जहा देश भर के कई स्थानो से संत महात्माओ का जमावड़ा होता है। इस मन्दिर का जुडाव रांची, अयोध्या, फतेहा, जलंधर आदि केन्द्रों से है।

सूर्य मंदिर के प्रधानपूजेरी सप्तर्षि श्री श्री 108 श्री मनोहर दास जी ने बताया कि सूर्य कुण्ड में स्नान कर सूर्य मंदिर में जो भी भक्त सच्चे मन से मन्नत रखते है उसके मनोकामना जरूर पूर्ण होते है। मनोकामना पूर्ण होने पर उनके परिजन सूर्य मंदिर पर पूरे परिवार के सांथ आ जाते है और तीन दिनो तक सूर्य मंदिर पर ही प्रसाद बनाकर खरना करते है और अगले दिन यही पर भगवान सूर्य को अघ्र्य अर्पित करने के लिए प्रसाद बनाकर अस्तांचल सूर्य को अघ्र्य अर्पित करने के बाद भगवान सूर्य का पूजा अर्चन करते है और रात भर जगे रह भगवान भास्कर को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए मनोकामना पूर्ति के लिए भगवान को धन्यवाद देते है। वही आजीवन फलाहार रह सूर्य मंदिर व रामजानकी मंदिर में पूजा करने का संकल्प लेने वाले फलाहारी बाबा उर्फ विष्णु दास जी महाराज जो सूर्य मंदिर के प्रधान सहयोगी पूजेरी है ने कहा कि यह परिसर हमारे गुरूजनो की तपस्या से तपो भूमि के रूप मे विख्यात है। यहा मनुष्य के हर प्रकार के कष्टो का निवारण होता जो भी व्यक्ति सच्चे मन से भगवान सूर्य का पूजा छठ के पावन अवसर पर यहा करता है उसके मनोरथ पूर्ण होते है। श्री विष्णु दास ने कहा कि यहा शिवालय स्थित हनुमान जी के सूक्ष्म मूर्ति भी मनोरथ पूर्ण करने वाला है उनके शरण में सिन्दुर व चमेली का तेल लेप कर प्रार्थना करता है उसकी मनोकामना पूर्ण होती है।

चैत्र छठ में भी उत्तर बिहार के प्रसिद्ध सूर्य मन्दिर कोठिया-नरांव सारण मे अद्भुत नजारा रहता है यहां गडखा, सदर व दिघवारा प्रखंडो से आस पास के आधा दर्जन पंचायतो के अलावे अन्य प्रखंडो के श्रधालु भी छठ पूजा के दिन एकत्र होते है। उनकी सेवा मे सूर्य मंदिर सेवा समिति व मंदिर प्रबंधन समिति के दर्जनो सदस्य सेवा अर्पित करने के लिए मुस्तैद रहते है। इसके अलावे स्थानीय प्रशासन भी किसी तरह की चुनौतियो से निपटने के लिए सूर्य कुण्ड से लेकर घाटो पर तैनात रहते है। जल कुण्ड मे एसडीआरएफ की गोताखोर टीम नौका पर सवार हो घाट के चारो तरफ गश्ती करते है। रात्रि मे भी स्थानीय प्रशासन दूर दराज से आये छठ व्रतियो की सुरक्षा में तैनात रहती है।


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