“पंछी यह समझते हैं चमन बदला है ,
हंसते हैं सितारे कि गगन बदला है !!
श्मशान की खामोशी मगर कहती है,
है लाश वही,सिर्फ कफन बदला है !!”

प्रधान संपादक
मधेपुरा/बिहार : उक्त पंक्तियां मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र के लिए प्रासंगिक है । मधेपुरा वही है, उम्मीदवार वहीं ,लेकिन पार्टी और समर्थक बदल गए हैं।मधेपुरा के मतदाता को ढाई दशक से लालू -शरद की राजनैतिक दुश्मनी की आदत सी पड़ गई थी । मगर बदलाव की ऐसी बयार बही कि इस चुनाव में लालू को सलाखों तक पहुंचाने वाले जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव खुद लालू के चुनाव चिह्न लालटेन लेकर घूम रहे हैं । कल तक जो लोग विरोधी थे वे आज शरद यादव की जयजयकार कर रहे हैं। विगत दिनों तक जो कुंबा शरद के लिए कैंपेन चलाता था, वह आज विरोध में मुखर है । बीते चुनाव के दौरान शरद यादव के पक्ष में मधेपुरा में महीना भर डेरा डालने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उनकी आज शिकस्त चाहते हैं और शरद यादव के सबसे विश्वासपात्र दिनेशचंद्र यादव जदयू के टिकट पर विरोध में चुनाव लड़ रहे हैं । इस बार के आम चुनाव का यह सबसे बड़ा बदलाव है । जिसकी सर्वत्र चर्चा है।
