भारत सरकार की राज काज और न्यायालय की भाषा शीघ्र बने हिन्दी – न्यायमूर्ति

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सीमाब अख्तर
वरीय उप संपादक

इस आह्वान और संकल्प के साथ संपन्न हुआ हिन्दी पखवारा

साहित्य सम्मेलन द्वारा विभिन्न प्रतियोगिताओं में सफल विद्यार्थियों को २७ हज़ार की राशि से पुरस्कृत किया गया

पटना/बिहार : भारत सरकार की राजकाज की भाषा शीघ्र बनेए जैसा कि १४ सितम्बर १९४९ को संविधान सभा ने पारित किया थाए इस आह्वान और संकल्प के साथएबिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा विगत १ सितम्बर से जारी श्हिन्दी पखवारा.सह.पुस्तक चौदस मेलाश् आज संपन्न हो गया। पखवारा के अंतर्गत सम्मेलन द्वारा आयोजित विविध प्रतियोगिताओं के सफल छात्र.छात्राओं को २७ हज़ार रूपए की राशिएपदक और प्रमाण.पत्र देकर पुरस्कृत किया गया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में अपना विचार व्यक्त करते हुए, पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेंद्र प्रसाद ने कहा किए यह चिंताजनक है कि हम स्वतंत्रता के सात दशक बीत जाने के बाद भीए अपने देश की भाषा को राष्ट्र की सरकार के कामकाज की भाषा नही बना सके हैं। विश्व में इससे हमारी प्रतिष्ठा गिरती है। किसी देश का सरकारी कामकाजएअपनी भाषा के स्थान पर किसी विदेशी भाषा में होता हो, ऐसा शायद हीं कोई दूसरा राष्ट्र होगा। भारत की सरकार के कामकाज के साथ न्यायालय के कामकाज की भाषा भी हिन्दी शीघ्र हो, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

सभा की अध्यक्षता करते हुए सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने अपने संकल्प को एक बार फिर दुहराते हुए कहा किए बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन इस विषय को लेकरए इस वर्ष से देश व्यापी आंदोलन आरंभ करेगा। आगामी १९ अक्टूबर से आरंभ हो रहे सम्मेलन की स्थापना के शताब्दी.वर्ष मेंए देश की सभी प्रांतीय सरकारों से यह आग्रह किया जाएगा कि वे भारत की सरकार कोए पत्र लिख कर कहे किए देश की राजकाज की भाषा श्हिन्दीश्बनाई जाए।

इसके पूर्व सम्मेलन के उपाध्यक्ष डा कुमार अरुणोदय नेए सम्मेलन द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगिता में सफल छात्र.छात्राओं को पुरस्कृत किया। पुरस्कृत विद्यार्थियों में प्रथम स्थान प्राप्त करने वालों कोए एक हज़ार रूपये, द्वितीय स्थान पाने वालों को ७५० रूपये, तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वालों को ५०० रूपये, की पुरस्कार.राशि, पदक और प्रमाण.पत्र के साथ प्रदान की गई।

इस अवसर पर सम्मेलन के उपाध्यक्ष नृपेंद्र नाथ गुप्तए डा मधु वर्मा, प्रो वासुकी नाथ झा, अमियनाथ चटर्जी, डा शहनाज फ़ातमी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। मंच का संचालन योगेन्द्र प्रसाद मिश्र ने किया।

इस अवसर पर प्रतियोगिता आयोजन समिति के संयोजक प्रो सुशील कुमार झा, डा नागेसगवर प्रसाद यादव, आचार्य आनंद किशोर शास्त्री, डा शालिनी पाण्डेय, दाविनय कुमार विष्णुपुरी, डा सुधा सिन्हा, राजकुमार प्रेमी, आनंद किशोर मिश्र, ओम् प्रकाश वर्मा, शुभ चंद्र सिन्हा, डा सुलक्ष्मी कुमारी, अम्बरीष कांत, जयप्रकाश पुजारी समेत बड़ी संख्या में छात्रगणए शिक्षक एवं अभिभावक उपस्थित थे।

पुरस्कृत विद्यार्थियों की सूचीय

प्रथम पुरस्कार . रिया कुमारी

द्वितीय पुरस्कार. किशोर कुमार

तृतीय पुरस्कार . चंदन कुमार

सांत्वना पुरस्कार. शक्ति श्रेय

वर्ग-ख

प्रथम पुरस्कार . मोनिका कुमारी

द्वितीय पुरस्कार. अनमोल गीता

तृतीय पुरस्कार . शिल्पा कुमारी

वर्ग-ग

प्रथम पुरस्कार . वेनिश

द्वितीय पुरस्कार. आनंद प्रवीण

तृतीय पुरस्कार . अंशु प्रिया

सांत्वना.प्राची झा

२द्धनिबंध लेखन प्रतियोगिताय

वर्ग-क

प्रथम पुरस्कार . कीर्ति रानी

द्वितीय पुरस्कार. सोनल कुमारी

तृतीय पुरस्कार . जिज्ञासा कुमारी

वर्ग-ख

प्रथम पुरस्कार . आनंद प्रवीण

द्वितीय पुरस्कार . पूजा वंदना

तृतीय पुरस्कार . चंद्र प्रकाश

३द्धव्याख्यान.प्रतियोगिताय

प्रथम पुरस्कार . पूजा वंदना

द्वितीय पुरस्कार. तबसीर आलम

तृतीय पुरस्कार . ऋचा कुमारी

४द्धकाव्य.पाठ प्रतियोगिता

वर्ग-क

प्रथम पुरस्कार . कृष्ण प्रिया

द्वितीय पुरस्कार. सूरज कुमार

तृतीय पुरस्कार . अतुल वैभव

वर्ग-ख

प्रथम पुरस्कार . प्रियंतरा भारती

द्वितीय पुरस्कार . रतनावली कुमारी

तृतीय पुरस्कार . अतुल राय


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