पंजाब : बाबरी मस्जिद की शहादत को भुलाया नहीं जा सकता, मुसलमानों को सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंजूर होगा-शाही इमाम पंजाब 

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मेराज आलम
ब्यूरो, लुधियाना

लुधियाना/पंजाब : 1992 को 6 दिसंबर के दिन अयोध्या में शहीद कर दी गई बाबरी मस्जिद की बरसी के मौके पर आज यहां मजलिस अहरार इस्लाम हिंद की ओर से जामा मस्जिद में शोक सभा का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवीं ने की। इस अवसर पर पवित्र कुरआन शरीफ पढ़ कर शहीद बाबरी मस्जिद के लिए दुआ करवाई गई।

शोक सभा को संबोधित करते हुए शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान ने कहा कि आज 6 दिसंबर का दिन भारत के इतिहास में काले अक्षरों में लिखा हुआ है क्योंकि आज के दिन कानून और संविधान को तोड़ते हुए ऐतिहासिक बाबरी मस्जिद को शहीद कर दिया गया था और धर्म के नाम पर देश भर में दंगे करवा कर सैंकड़ों बेगुनाहों की कुर्बानी दे दी गई। शाही इमाम ने कहा कि केंद्र में भाजपा सरकार सत्ता में आने के बाद लगातार आपसी सहमति के लिए मुसलमानों पर दबाब बना रही है। क्या सहमति की बात करने वालों को भारतीय न्यायप्रणाली पर यकीन नहीं हैं? उन्होनें कहा कि 70 साल एक मुकद्दमा चलने के बाद अब जब फैसले की घड़ी करीब आ गई है तो अदालत के बाहर बातचीत करना किसी भी तरह उचित नहीं।

शाही इमाम ने कहा कि मुसलमानों को उच्च न्यायलय का हर फैसला मंजूर होगा और हमें उम्मीद है कि अदालत किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं करेगी। शाही इमाम ने कहा कि धर्म के नाम पर सत्ता के लालची लोकसभा चुनाव आते ही एक बार फिर से शहीद बाबरी मस्जिद और राम मंदिर का मुद्दा उठा रहे हैं, जबकि बीते 5 वर्षों में सत्ता का सुख भोगते हुए इन्हें कभी यह मुद्दा याद नहीं आया। शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान ने कहा कि संप्रदायिक ताकतें देश भर में इस मुद्दे को लेकर अल्पसंख्यकों को डराना चाहती हैं। वह यह खामख्याली अपने दिमाग में से निकाल दे। अब कोई किसी से डरने वाला नहीं है। देश की जनता जागरूक हो चुकी है। उन्होनें कहा कि शहीद बाबरी मस्जिद की इमारत गिरा दी गई है लेकिन कयामत तक वह मस्जिद ही रहेगी।

इस अवसर पर कारी अलताफ उर रहमान, गुलाम हसन कैसर, कारी मुहम्मद इब्राहिम, मौलाना मुहम्मद मौहतरम, बाबुल खान, शाह नवाज खान, नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उसमान रहमान लुधियानवीं व मुहम्मद मुस्तकीम अहरारी भी उपस्थित थे।


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