किशनगंज पुलिस महकमा : जब नौकरी करनी है तो कहीं भी कर लेंगे भाई…

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शशिकान्त झा
वरीय उप संपादक

किशनगंज/बिहार : पिछले दो माहों से बदली-बदली और बदली पर जिले में हायतौबा का माहोल बना है । किसी को निकल लेने की फिक्रें सता रही है तो किसी को जगह पकड़ने की हड़बड़ी है । जहां की अफरातफरियों के बीच अनजाने में एक आबाज सुनाई पड़ जाती है कि -जब नौकरी करनी है तो कहीं भी कर लेंगे भाई ।
फिलवक्त पुलिस महकमा में माहोल कम व वेश ऐसा हींं बना हुआ है । किसी को कुर्सी जाने का भय तो कहीं सही जगह पर जाने की चिंताओं के बीच नीरव सन्नाटा । आंकड़ों के अनबुझी पहेलियों की घनी चादर और पुलिस मुख्यालय से आनेवाले हुक्मनामे महकमें की निंदें और चैन उड़ा रखे हैं । गुणा भाग के फल निकालने के माहिरों के पसीने जुराबों तक को छू चुके हैं पर हिसाब सही नहीं लग रहा है ।

कहना गलत नहीं होगा कि हर कोई मन हींं मन कुछ अलग हिसाब लगाने में भिड़े हैं । पर ना तो कोई आरहा है और ना हीं कोई जा रहा है । पुलिस सूत्रों के मुताविक रेंज से बाहर जाने वाले पदाधिकारी तैयार बैठे हैं तो कोई आखिरी वक्त में भी जुगाड़ लगाने में व्यस्त नजर आते हैं । पर अब तक की जानकारियों में हवा का रुख कोई भी नहीं जान पा रहे है । सच कही जाय तो यह एक ऐसा समय आ गया है कि सूत्र कहीं भी उपयुक्त नहीं है । हर कोई आने वाले समय की प्रतीक्षा में बैठा है ।


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