मधेपुरा : पंद्रह सूत्री मांगों को लेकर कल 28 नवंबर को मुख्यमंत्री का घेराव करेंगी आंगनबाड़ी सेविका – सहायिका

728x90
Spread the news

आरिफ आलम
संवाददाता, चौसा, मधेपुरा

चौसा/मधेपुरा/बिहार : बिहार राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन के तत्वाधान में कल 28 नवंबर बुधवार को सेविका और सहायिकाएं अपनी पंद्रह सूत्री मांगों को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का घेराव करेंगी। यदि उनकी मांगें नहीं मानी गई तो आगामी 5 दिसंबर से सभी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली जाएंगी।

उक्त बाबत बिहार राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन की मधेपुरा जिला अध्यक्षा पल्लवी कुमारी ने बताया कि सेविका तथा सहायिकाएं अपनी 15 सूत्री मांगों को लेकर कल 28 नवंबर को पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का घेराव करेंगी। घेराव के दौरान एक दिवसीय धरना- प्रदर्शन भी किया जाएगा। जिला अध्यक्षा ने यह भी बताया कि यदि सरकार ने उनकी मांगे पूरी नहीं की तो आगामी 5 दिसंबर से प्रदेश की सभी सेविका – सहायिकाएं अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली जाएंगी । जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होगी यह सिलसिला जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि आंदोलन कार्यक्रम की सूचना लिखित रूप से जिला पदाधिकारी, डीपीओ तथा सीडीपीओ को भी दे दी गई है ।
आंदोलन की विस्तृत जानकारी देते हुए श्रीमती कुमारी ने बिहार राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन की मांगों से “द रिपब्लिकन टाइम्स” को अवगत कराया । जो निम्नवत हैं –

आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं की मांगें

*आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिकाओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देते हुए सेविका को तृतीय वर्गीय और सहायिका को चतुर्थवर्गीय कर्मचारी में समायोजित किया जाए।
* जब तक सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिलता सेविका को ₹18000 तथा सहायिका को ₹12000 का मानदेय प्रतिमाह दिया जाए।

* 54 दिन हड़ताल के उपरांत मई 2017 को हुए समझौते के आलोक में लंबित मांगों का शीघ्र निष्पादन किया जाए।

*दक्षिणी राज्यों के नीति के समान ही बिहार सरकार द्वारा भी ₹7000 सेविका और ₹4500 सहायिका को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जाए।

* सेविका को पर्यवेक्षिका एवं सहायिका को सेविका के पद पर शत प्रतिशत पदों पर प्रोन्नति भी जाए उम्र सीमा समाप्त की जाए ।

*सेवानिवृत्ति के पश्चात 5000 मासिक पेंशन एवं एकमुश्त 5 लाख की सहायता राशि बीमा का लाभ सुनिश्चित किया जाए।

* आंगनबाड़ी सेविका- सहायिका चयन मार्गदर्शिका एवं दंड निरूपण की प्रक्रिया कानून समाप्त किया जाए।

* 4 घंटे से अधिक काम करने के लिए मजबूर ना किया जाए। अगर 8 घंटा काम लिया जाए तो उसका पारिश्रमिक भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

* समान काम के लिए समान वेतन प्रणाली को लागू किया जाए। मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों के सेविकाओं को भी समान मानदेय दिया जाए।

* हड़ताल अवधि का मानदेय ना काटकर छुट्टी एवं कार्य दिवस में समायोजन किया जाए।

* निर्धारित कर्तव्यों के अतिरिक्त अन्य कार्यों में प्रतिनियुक्त नहीं करने से संबंधित विभागीय परिपत्र संख्या 768 दिनांक 27 फरवरी 2012 का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
या प्रतिनियुक्ति संबंधी लिखित आदेश एवं कार्य अनुरूप अनुमान्य पारिश्रमिक का भुगतान अनिवार्य रूप से किया जाए।

* महंगाई के आलोक में मकान किराया भत्ता की राशि में समुचित वृद्धि कर भुगतान की प्रक्रिया का सरलीकरण करते हुए नियमित भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

* मानदेय का न्यूनतम निर्धारण के आधार पर नियमित भुगतान तथा लंबित मानदेय का भुगतान किया जाए।

* बिना भौतिक सत्यापन के पोषाहार की वसूली पर तुरंत रोक लगाई जाए एवं वसूल की गई राशि को शीघ्र वापस किया जाए।

* आंगनबाड़ी का किसी तरह निजीकरण नहीं किया जाए तथा कोई कार्य जीविका, गैर सरकारी संगठनों, स्वयं सहायता समूह आदि को सौंपने की साजिश पर रोक लगाई जाए।


Spread the news