लुधियाना : इन्सानों में ऊँच-नीच पैदा करने वाले लोग समाज के लिए नासूर है-उसमान लुधियानवी

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मेराज आलम
ब्यूरो, लुधियाना

लुधियाना/पंजाब : बीते दिन यहां जमालपुर विश्वकर्मा कालोनी में मुस्लिम समुदाय की ओर से एक धार्मिक समागम का आयोजन किया गया, जिसमें विशेष रूप से जामा मस्जिद के नायाब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उसमान रहमानी लुधियानवी उपस्थित हुए।

इस मौके पर जन समूह को संबोधित करते हुए मौलाना उसमान ने कहा कि हजरत मुहम्मद सल्ललाहु अलैहीवसलम ने दुनिया भर के इन्सानों को आपसी भाईचारे का संदेश दिया। उन्होने कहा कि हमारे नबी हजरत मुहम्मद सल्ललाहु अलैहीवसलम ने इन्सानों में रंग, नस्ल, अमीरी और गरीबी को लेकर किए जाने वाले भेद भाव और छुआ छूत का दुनिया से खत्म किया। मौलाना ने कहा कि जो भी व्यक्ति छुआ छूत करते है वह दरअसल इन्सानों की शक्ल में हैवान है ऐसे ही लोग समाज के लिए नासूर है जो कि समाज को भेद भाव से बांट रहे है। मौलाना उसमान ने कहा कि इन्सान का झूठा पवित्र है उसे खाने में कोई परहेज नहीं, इस्लाम धर्म ने यह काम हकीकत में करके दिखाया और यही वजह है कि आज इस्लाम धर्म विश्व का सबसे बड़ा धर्म है।

नायब शाही इमाम मौलाना उसमान ने कहा कि सभी इन्सान एक बराबर है। सब अल्लाह के बन्दे है। किसी भी ताकतवर और बड़े व्यक्ति को यह अधिकार नहीं है कि वह किसी दूसरे व्यक्ति को रंग और जात बिरादरी के नाम से अपने से कम समझे, उन्होंने कहा कि आप लोग देख रहे हैं कि आज दुनिया के सभी विकसीत देश सिर्फ इस्लाम और मुस्लमानों की विरोधता में पूरी ताकत झोंक रहे है जबकि असल वजह आतंकवाद नहीं बल्कि दुनिया भर में सरमायादारों की ओर से आम लोगों पर कसा गया शिकंजा है। जिससे विकसीत देशों की कार्यप्रणाली ने इन्सान का गुलाम बना कर रख दिया है और इस्लाम धर्म ही वह रास्ता है जो कि इन्सानों को इन्सानों की गुलामी से आजादी का संदेश देता है। यूरोप के विकसीत देश जो कि बड़ी-बड़ी कम्पनीयों के साथ दुनिया को इस समय अपने पंजे में ले चुके है। इसी संदेश से घबराते है और जंग धोप कर इस्लाम को बदनाम करना चाहते है। नायब शाही इमाम ने कहा कि हमें सच्चा मुस्लमान बनकर अपने समाज और देश की सेवा करनी है और बुराईयों को छोडक़र अच्छाईयों को आम करने का संकल्प लेना होगा।

इस मौके पर मुहम्मद रब्बानी, मुफ्ती वसीम अकरम, मुहम्मद साबिर, मुफ्ती मुहम्मद, मुकतदीर, मुहम्मद जाबीर, मुहम्मद निसार, मुहम्मद जुल्फकार, मुहम्मद आबूल, मुहम्मद मुश्ताक, मुहम्मद कलाम व शाही इमाम के मुख्य सचिव मुहम्मद मुस्तकीम आदि उपस्थित थे।


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