किशनगंज : बनते नहीं यूं हीं मुकद्दर-बस एक हुनर लाजबाब चाहिए….

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शशिकान्त झा
वरीय उप संपादक

किशनगंज/बिहार : “बनते नहीं यूं हीं मुकद्दर-बस एक हुनर लाजबाब चाहिए , होते हैं हीरे भी शामिल -ए -पत्थर,बस एक नजर नायाब चाहिए “ बड़े हींं खुशनुमा माहोल के चंद लम्हों में शायराना अंदाज से फरोग -ए – उर्दू का माहौल और भी बेहतर खूशनुमा बनाया किशनगंज के एस.पी.कुमार आशीष ने । जहां उर्दू में अपना नाम गलत देखकर हाजरीनों और पूरे अंवेदकर नगर (टाऊन हाल ) को सकते में डाल दिया ।

मौका था “जिला स्तरीय फ़रोग -ए -उर्दू सेमिनार ” का, जिसे केबिनेट सेक्रेटारियट ,उर्दू डायरेक्टिरयेट ने यहां आर्गनाईज कराने का फैसला लिया था । जो यहाँ सालाना जलसे के तौर पर मुकम्मल किया जाता रहा है ।
अपने चंद मिनटों के तकरीर में उर्दू जुवान के बेहतरीन तल्लफुजों से मजलिसे हाजरीनों को उर्दू की तहरीक से रुबरु करा सबों के दिलों में उर्दू के जजबातों को जगाकर रख दिया । इतना हीं नहीं बल्कि यह जाहिर हो रहा था कि एस .पी .  श्री  आशिष के दिल में उर्दू से प्यार की वे तमाम जजबात की बातें ,जो उनके दिल की गहराइयों में छुपी करबटें बदल रही थी आज उनके जुवान पर थी । जजबात ऐसे कि उर्दू को हिंदी का बेहतरीन तौफा देकर हिंदी जुवान का खाला तक करार दे दिया । मजलिश इनके मुखातिब होकर जोरदार तालियों से इनकी हौसलाफजाई में दो कदम आगे थी ।

जे .एन .यू .दिल्ली के छात्र रहे चुके  कुमार आशीष,जो अपने जमाने के स्कालर थे, और पुलिस महकमें रोज -व -रोज नये नये इजादों के जरिये अपने स्कालर होने का एहसास महकमा और अवाम को कराते रहते है । एक तरफ तो बड़े बड़े वारदातों को अंजाम देने की साजिशें करने बाले अफरादों के दिलों में इस नाम का खौफ बनता जा रहा है । एस .पी . श्री आशीष ने इस प्रोग्राम में सामयिनों का सभी त्योहारों को जिस मुस्तैदी से अंजाम दिया गया उसके लिए शुक्रिया अदां की और गुजारिश की , कि मिलादुन्नबी के मौके पर भी उनका साथ मिलेगा जो अमन व भाईचारगी की मिसालें कायम करते सूबा ए बिहार को एक बेमिशाल तोहफा देगा ।

इस मौके पर एस .पी .  ने अपने तसवुर्र के ख्यालातों का इजहार करते “वो यार हो खुशबू की तरह ,हो जिसकी जुवां उर्दू की तरह ” के शेर को पढ़कर उर्दू से वेपनाह मोहब्बत की मिसाल  पेश की । गौरतलब है कि, होठों पे ऐसी बात जो जुवां पे चली आई …….. ,यह बतौर सबूत एहसास किया गया कि बातें फख़त तकरीर की नहीं ,ये दिलों में उर्दू के लिए कुछ खास जजबातों से जुड़े रहने का नाम है । जबकि एस .पी .ने मजलिस में इस बात का ऐलान भी कर दिया कि अब हर थाना अपना नाम हिंदी के साथ उर्दू में भी लिखेगा । इस दौरान इन्होने किशनगंज के डी.एम .  महेन्द्र कुमार से भी अपने पूरे महकमें और मातहतों को ऐसा करने की पुरजोर गुजारिश कर डाली ।

इस सेमिनार में खासतौर पर एम .एल .सी . दिलीप कुमार जयसवाल, एम .एल .ए . मास्टर मुजाहिद आलम, ठाकुरगंज एम .एल .ए . नौशाद आलम ,जे.डी .यू बिहार के नायाब सदर  महमूद असरफ की मौजूदगी रही । वहीं बेहतर इन्तेजामात के माहिर एस .डी .एम .किशनगंज फिरोज अख्तर ,जिनके जेरेनिगरानी में फ़रोग ए उर्दू के के इस कामयाब सेमिनार के लिए जिले के डी .एम .और एस .पी .ने इन्हें बेस्ट मेनेजर का भी खिताब दे डाला ।

पुलिस पदाधिकारियों को प्रशस्ति-पत्र देकर किया गया सम्मानित

फरोग ए उर्दू कार्यक्रम के दूसरे और अंतिम चरण में जिले के डी एम और एस पी ने बीते त्योहारों पर विधिव्यवस्था और शांति बनाये रखने वाले जिले के पुलिस पदाधिकारियों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया ।
प्रशस्ति-पत्र लेने वालों में जिला के अन्य थानाध्यक्षों सहित बहादुरगंज पुलिस सर्किल के तेजतर्रार पुलिस निरीक्षक राजेश कुमार तिवारी भी थे जो इसके पूर्व ठाकुरगंज आदर्श थाना थानाध्यक्ष भी रह चुके हैं जो बहादुरगंज में रहकर यहां के थानाध्यक्ष इरशाद आलम के साथ मिलकर हर मोर्चों पर कामियाब साबित हुए हैं । ये स्थानीय थाना हो या फिर सर्किल के सुदूर देहाती क्षेत्रों मे स्थापित थानों की, जहां की विधिव्यवस्थाओं को अपनी नेतृत्व क्षमताओं से सजा संवार लेते हैं । जिसका उदाहरण इनके सर्किल का थाना बीबीगंज में, जहां स्वयं जिला के एस .पी .कुमार आशीष “किशनगंज पुलिस आपके द्वार” कार्यक्रम में हिस्सा लेने आने वाले थे । बीबीगंज थाना के परिसर बिल्कुल सुनसान था । जहां पहुंचते हींं ए एस आई बिजय कुमार से सहयोग लेकर दस मिनट में थाना को कार्यक्रम स्थल में बदलकर रख दिया । जिसे बीबीगंज के लोगों ने देखा और इनकी काफी तारिफें की । जबकि मुहर्रम और दूर्गापूजा में विधिव्यवस्थाओं से लेकर ट्राफिक को सुचारु रुप संचालित करने में इनका और थानाध्यक्ष का कोई सानी नहीं था और यह कहा जा सकता है कि इन्हीं कारणों से इन्हे प्रशस्ति-पत्र दिया गया ।


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