न्याय व्यवस्था आज भी है जिंदा, इसलिए बचा है लोकतंत्र एवं संविधान : पप्पू यादव

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मधेपुरा/बिहार : जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह मधेपुरा लोकसभा के पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को न्यायालय ने 32 साल पुराने अपहरण के मामले में सबूत के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया है. सोमवार को व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित न्यायाधीश एडीजे तृतीय सह सांसद-विधायक संबंधी मामले के विशेष न्यायाधीश निशिकांत ठाकुर ने सत्र वाद 161/21 में पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को सबूत के अभाव में रिहा कर दिया है.

मालूम हो कि मुरलीगंज थाना में वर्ष 1989 में पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव पर अपहरण का एक मामला वीरगांव निवासी शैलेंद्र यादव द्वारा दर्ज करवाया गया था. इस मामले में जमानत के बाद पप्पू यादव कभी न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए और उन्हें न्यायालय द्वारा फरार घोषित कर दिया गया. जिसके बाद उन्हें बड़े ही नाटकीय तरीके से पटना से गिरफ्तार किया गया. पप्पू यादव 11 मई 2021 से जेल में बंद थे. अस्वस्थ होने के कारण उन्हें दरभंगा मेडिकल कॉलेज में रखा गया था. इस मामले में उनकी जमानत याचिका खारिज भी हो चुकी थी.

पप्पू यादव के रिहा होने से जाप कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर : मामले में पप्पू यादव की ओर से पैरवी अधिवक्ता मनोज कुमार अम्बष्ट कर रहे थे. न्यायालय से अपहरण के मामले में रिहा होने के बाद पप्पू यादव को पुनः दरभंगा मेडिकल कॉलेज ले जाया गया. जहां से उन्हें कागजी प्रक्रिया के बाद छोड़ा जायेगा. पप्पू यादव के रिहा होने की सूचना मिलते ही, न्यायालय परिसर के बाहर खड़े जाप कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई. सड़क पर सभी कार्यकर्ता एक दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर एवं मिठाई खिलाकर बधाई देने लगे. शहर का सड़क पर पप्पू यादव के पक्ष के नारों से गूंजने लगा. वहीं कार्यकर्ताओं ने न्यायालय के निर्णय पर धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि यह न्याय की जीत हुई है. मौके पर पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने कहा कि हमें पता नहीं है कि सरकार ने हमें पांच महीना परेशान क्यों किया है.

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न्याय व्यवस्था आज भी है जिंदा, जिसके कारण बचा है लोकतंत्र एवं संविधान : पप्पू यादव ने कहा कि आज जो न्यायालय के द्वारा निर्णय सुनाया गया है और हमें भी रिहा किया गया है, यह करोड़ों जनता का आशीर्वाद है. हम सिर्फ इतना जानते हैं कि सत्य की हमेशा जीत हुई है. न्याय व्यवस्था आज भी जिंदा है, जिसके कारण लोकतंत्र एवं संविधान बचा हुआ है. अन्यथा मुझ जैसे लड़ने वाले लोगों का कल्याण नहीं है. कहीं पर गाड़ी चढ़ा के मार दो तो कहीं पर गोली से मार दो. जहां मन आये, वहीं मार दो. किसी को एक रूम में कैद करके मार दो. डेमोक्रेसी समाप्त हो चुकी है और कोई बोलने वाला नहीं है. देश की स्थिति बहुत बुरी हो चुकी है और आपातकाल की स्थिति हो चुकी है. पप्पू यादव ने कहा कि मैं सिर्फ इतना कहूंगा कि सच्चाई की जीत हुई है. जनता के आशीर्वाद से न्याय व्यवस्था ने जो न्याय दिया है उसके लिए मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं. उन्होंने कहा कि सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन सत्य हार नहीं सकता है. मुझे एक ऐसे मामले में पांच महीने बंद रखा गया, जिसमें आम आदमी को एक दिन भी नहीं रखा जा सकता है. बस इन्हें अपनी गलती छुपाने के लिए पप्पू यादव को मार देना है.

अमित कुमार अंशु
उप संपादक

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