बीएनएमयू : सीनेट, सिंडीकेट व सरकार के फैसले साबित हो रहे हैं हाथी के दांत : राठौर

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अमित कुमार अंशु
उप संपादक

मधेपुरा (बिहार) : वाम संगठन एआईएसएफ एवं एआईवाईएफ द्वारा संयुक्त रूप से सोमवार को विश्वविद्यालय प्रशासन का पुतला दहन किया गया. एआईवाईएफ के राष्ट्रीय परिषद सदस्य शंभू क्रांति की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एआईएसएफ के राष्ट्रीय परिषद सदस्य सह बीएनएमयू प्रभारी हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने कहा कि बीएनएमयू में भ्रष्टाचार चरम पर है. सरकार एवं सीनेट-सिंडीकेट द्वारा लिए गए फैसले का कोई पालन नहीं होता है, सिर्फ मनमानी चलती है. संगठन द्वारा साक्ष्य उपलब्ध कराने के बाद भी बीएड को लेकर जांच की पहल नहीं होना दर्शाता है कि सरकारी संस्थानों में बीएड को चौपट करने की साज़िश चल रही है. लगातार आंदोलन एवं सूची उपलब्ध कराने के बाद भी न तो गर्ल्स हॉस्टल शुरू कराया गया और न ही दोनों परिसर में पुलिस चौकी खोला जा सका. सरकार के फैसले के बाद भी गर्ल्स व एससी-एसटी को नि:शुल्क शिक्षा शुरू नहीं हुआ. पैट 2020 की तारीख अभी तक तय नहीं कि गई है. पैट 2019 के कोर्स वर्क की परीक्षा का मूल अंकपत्र उपलब्ध नहीं हुआ.

संगठन मजबूती से कर रहा है 14 दिसंबर को होने वाली धरना की तैयारी
छात्र नेता राठौर ने कहा कि अब आवेदन कि जगह आंदोलन का दौर शुरू हुआ है, जो बीएनएमयू के सक्रिय होने तक जारी रहेगा. कार्यक्रम का संचालन करते हुए एआईएसएफ के संयुक्त जिला सचिव सौरभ कुमार ने कहा कि बीएनएमयू को पूरी तरह से बरबाद करने का काम किया जा रहा है. लगातार छवि धूमिल हो रही है. सबकुछ होने के बाद हाल ही में राजभवन द्वारा बीएनएमयू की शिथिलता की बात कहना इसका प्रमाण है. एआईएसएफ लगातार आवेदन देकर समाधान की मांग करता रहा है, जिसकी अनदेखी बड़े स्तर पर की गई. जिसे बर्दास्त नहीं किया जा सकता है. छात्र नेता दीपांशु सिंह राजपूत ने कहा कि संगठन 14 दिसंबर को होने वाली धरना की तैयारी मजबूती से कर रहा है. जिसमें छात्र हित के मुद्दों पर जोरदार विरोध होगा.
नामांकन, परीक्षा व परिणाम को समय पर नहीं ला पा रहा बीएनएमयू : शंभू क्रांति
पुतला दहन कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये एआईवाईएफ के राष्ट्रीय परिषद सदस्य शंभू क्रांति ने कहा कि दोनों वाम संगठन द्वारा संयुक्त रूप पुतला दहन के साथ शुरू यह आंदोलन लंबे संघर्ष का आगाज है. विश्वविद्यालय छात्रों के लिए होता है, लेकिन स्थापना के तीन दशक पूरा करने जा रहे बीएनएमयू में समय पर नामांकन, परीक्षा व परिणाम अब तक सपना बन कर ही रह गया है. बीएसएस कॉलेज सुपौल में आदेश के बाद भी स्नातकोत्तर की पढ़ाई नहीं होना, सीनेट-सिंडीकेट के फैसले के बाद भी विभिन्न विषयों में स्नातकोत्तर की पढ़ाई नहीं होने के साथ संगीत व नाट्यशास्त्र तथा पत्रकारिता की पढ़ाई शुरू करवाने में प्रयास कर शिथिल हो जाना दुखद है. दोनों वाम संगठन पूरी तरह से विश्वविद्यालय की अराजकता के खिलाफ कमर कस चुका है. विश्वविद्यालय को छात्रहित में पहल जल्द करनी होगी, वरना आने वाले समय में आंदोलन और तेज होगा. छात्रा मुस्कान ने पुतला में आग लगाया. इस अवसर  सहरसा एआईएसएफ के प्रेम शंकर सिंह, एआईवाईएफ के ध्रुव कुमार ,अरविंद कुमार, दीपांशु सिंह ,एआईएसएफ के  सिंटू, दमन, आरके सिंह, रमन, विवेक, सुरेश, मनीष, शंकर, सुमन आदि उपस्थित थे.

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