मधेपुरा : सरकार आंदोलनकारी किसानों से करें वार्ता व वापस लें किसान विरोधी काला कानून, अन्यथा तेज होंगे संघर्ष : प्रो चंद्रशेखर

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अमन कुमार
संवाददाता, सदर
मधेपुरा

मधेपुरा (बिहार) :  दिल्ली में किसान विरोधी काला कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों पर सरकार द्वारा दमनात्मक कार्रवाई के खिलाफ वामदलों के राज्य व्यापी आह्वान पर बुधवार को भाकपा, माकपा व भाकपा माले के अलावे राजद एवं कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने समाहरणालय पर विरोध प्रदर्शन किया. समाहरणालय के सामने प्रदर्शन करने से पूर्व भाकपा, माकपा, भाकपा माले, राजद एवं कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय स्थित का भवन के समक्ष एकजुट होकर, विरोध मार्च निकाला, जो समाहरणालय के समक्ष पहुंच कर विरोध प्रदर्शन किया. इस अवसर पर महागठबंधन के कार्यकर्ताओं ने नरेंद्र मोदी की सरकार के खिलाफ जमकर की नारेबाजी. मौके पर उपस्थित आम लोगों एवं प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए स्थानीय राजद विधायक एवं बिहार सरकार के पूर्व मंत्री प्रो चंद्रशेखर ने कहा कि अन्नदाता किसान भगवान हैं. इन पर दमनात्मक कार्रवाई स्वीकार नहीं की जायेगी. नरेंद्र मोदी की सरकार आंदोलनकारी किसान संगठनों से शीघ्र वार्ता करें एवं किसान विरोधी काला कानून वापस ले. अन्यथा संघर्ष तेज होंगे. उन्होंने कहा कि सबसे पहले नरेंद्र मोदी की सरकार जमीन हड़पने के लिए अध्यादेश लाए और अब खेती हड़पने के लिए कृषि संबंधी तीन काला कानून लाए हैं.
नरेंद्र मोदी की सरकार पूरी तरह संवेदनहीन एवं किसान विरोधी
पूर्व मंत्री सह विधायक प्रो चंद्रशेखर ने कहा कि यह तीनों बिल किसानों की फसल को पूरी तरह कारपोरेट के हवाले करने का काला कानून है. इसके विरुद्ध मधेपुरा सहित देशभर में महागठबंधन चरणबद्ध आंदोलन चलायेगी. भाकपा के राष्ट्रीय परिषद के सदस्य प्रमोद प्रभाकर ने कहा एक और दिल्ली में किसानों पर लाठियां बरसाई जा रही है थी, दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनारस में संगीत का आनंद उठा रहे थे एवं गृह मंत्री अमित शाह हैदराबाद में लोकल बॉडी का चुनाव प्रचार कर रहे थे. उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी की सरकार पूरी तरह संवेदनहीन एवं किसान विरोधी है. राजद के जिलाध्यक्ष जय कांत यादव ने कहा कि इस काला कानून से कृषि, कारपोरेट घराना का एक व्यवसाय बन कर रह जायेगा एवं किसान उनके गुलाम हो जायेंगे. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार हर हाल में यह काला कानून वापस ले. कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सत्येंद्र कुमार सिंह यादव ने कहा कि यह देश कृषि प्रधान देश है और खेती इसकी आत्मा है. मोदी सरकार सुनियोजित रूप से खेती को बर्बाद करना चाहती है, लेकिन उनके इस इरादे को हम सब मिलकर चकना चूर कर देंगे. माकपा के राज्य कमेटी सदस्य गणेश मानव एवं जिला मंत्री मनोरंजन सिंह ने कहा कि कारपोरेट प्ररस्त नीतियों के कारण देश आज गंभीर संकट में है. जिसमें सबसे बुरा हाल किसानों का है.
किसानों का जेब खाली कर अमीरों को भरना चाह रही है सरकार
भाकपा माले के जिला सचिव रामचंद्र दास एवं वरीय नेता शंभू शरण भारतीय ने कहा कि मोदी सरकार किसानों का जेब खाली कर अमीरों की जेब भरना चाह रही है और किसान आंदोलन का दमन कर रही है.यह किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जायेगी. भाकपा के जिला मंत्री विद्याधर मुखिया एवं किसान सभा के सचिव रमन कुमार ने कहा कि जब मंडी प्राइवेट होगी तो सरकार एमएसपी पर खरीद कैसे करेगी. मोदी सरकार एक बार पुनः धोखा दे रही है. विरोध प्रदर्शन में राजद के जिला महासचिव नजीरउद्दीन उर्फ नूरी, वरीय नेता रामकृष्ण यादव, किसान नेता प्रकाश कुमार पिंटू, डा राजेश रतन उर्फ मुन्ना, सुरेश कुमार यादव, भारत भूषण, कमल दास, नित्यानंद यादव, वामपंथी नेता, जहांगीर, धीरेंद्र यादव, छात्र नेता ईशा असलम, वसीम उद्दीन उर्फ नन्हे, निशांत यादव, राजदीप कुमार, प्रवीण यादव, नीतीश यदुवंशी, चंदन यादव, जापानी यादव, राजा कुमार, विकास यादव, विमल विद्रोही, सुशील यादव, किसान नेता कृत्य नारायण यादव, श्यामानंद गिरी, ओम प्रकाश, रोशन कुमार, सीताराम रजक, साजदा खातून, प्रमिला देवी, कमला देवी, शशि कला देवी, जुलेखा खातून, शंकर कुमार, रफी अहमद, इरशाद, हिमांशु कुमार, प्रशांत कुमार, मजदूर नेता कृष्णा मुखर्जी, सनाउल्लाह, युवा नेता नवीन कुमार, जितेंद्र कुमार मुन्ना, शंभू क्रांति, सिराज, मादुराम, शुभम कुमार स्टालिन समेत बड़ी संख्या में महागठबंधन एवं वामदल के नेता एवं कार्यकर्ता शामिल थे.


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