मधेपुरा : टीचर्स एसोसिएशन ने सीएम को लिखा पत्र, शिक्षण संस्थाओं को खोलने की मांग की

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» टीचर्स एसोसिएशन ने कहा जब बाजार खुले, गाड़ियां शुरू हुई   फिर शिक्षण संस्थान बन्द क्यों?

अमित कुमार अंशु
उप संपादक

मधेपुरा/बिहार : प्राइवेट स्कूल टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन, मधेपुरा ने सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर निजी विद्यालयों सहित कोचिंग सेंटर को खोलने की मांग की है।

एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष गरिमा उर्विशा और सचिव हर्ष वर्धन सिंह राठौर के हस्ताक्षर से भेजे गए आवेदन में संगठन ने लॉक डाउन के कारण बन्द हुए  निजी विद्यालयों सहित कोचिंग सेंटर के संचालकों, शिक्षकों व  कर्मियों के लगातार दयनीय होते हालात से अवगत कराते हुए यथाशीघ्र पहल की मांग की है। कहा कि  वैश्विक महामारी कोरोना के कारण सरकारी आदेशानुसार सभी शिक्षण संस्थाओं में ताला लटका हुआ है, जिससे खासकर निजी शिक्षण संस्थाओं से जुड़े शिक्षकों एवं कर्मियों की माली हालत बहुत दयनीय हो गई है। कई शिक्षक बची-खुची जमा पूंजी खत्म हो जाने के कारण विवश होकर वे आत्महत्या करने के साथ-साथ किसी प्रकार जीवन यापन करने के लिए  जेवर बेचने, जमीन गिरवी रखने, उच्च ब्याज दर पर पैसा लेने के लिए विवश हैं। जो भविष्य के लिए सुखद संकेत नहीं है। छोटे स्तर पर स्कूल व कोचिंग चलानेवालों की हालत और भी गंभीर हो गई है।

उन्होंने कहा कि समाज व राष्ट्र निर्माता कहे जाने वाले शिक्षक आज खुद के परिवार का भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं । एसोसिएशन के जिला सचिव हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने कहा कि पांच माह से निजी शिक्षण संस्थाओं से जुड़े लोगों के आय के स्रोत पूरी तरह बन्द हैं। विगत कुछ दिनों में सरकार द्वारा बाजार खोलने के साथ-साथ परिवहन परिचालन की मंजूरी दी गई है। कहा कि बाजार, परिवहन, छोटे-बड़े उद्योग से कहीं बेहतर कोरोना से बचाव की व्यवस्था शिक्षण संस्थाओं में सम्भव है, क्योंकि यहां पढ़ने व पढ़ाने वाले अन्य किसी भी क्षेत्र से ज्यादा जागरूक व सजग होते हैं। इसके बावजूद भी सूबे में शिक्षण संस्थाओं को खोलने की पहल नहीं करना चिंतनीय है क्योंकि इससे वर्तमान और भविष्य दोनों दांव पर लग रहा है। श्री राठौर ने कहा कि यथाशीघ्र कारगर पहल नहीं की गई तो निजी विद्यालय के शिक्षकों सहित कोचिंग संचालकों का जीवन-यापन और कठिन हो जाएगा ।

उन्होंने कहा कि एसोसिएशन ने पत्र लिखकर सीएम नीतीश कुमार से मांग किया है कि सितम्बर माह से शिक्षण संस्थाओं को खोलने की पहल की जाए ताकि बच्चे और शिक्षकों की गतिविधि पूर्ववत हो सके। उन्होंने संगठन की ओर से मांग किया है कि सरकार को इस विषम दौर में निजी विद्यालयों के शिक्षकों व कोचिंग संचालकों के लिए विशेष पैकेज की भी घोषणा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को उम्मीद है कि सरकार जल्द ही सकारात्मक पहल करेगी।

एसोसिएशन के संयुक्त सचिव भारतेंदु सिंहानिया, कोषाध्यक्ष सोनू यादव एवं सत्यप्रकाश, मीडिया प्रभारी सोनी यादव एवं हृदय कुशवाहा ने एक स्वर में कहा कि मांग को गंभीरता से लेते हुए सीएम तक पहुंचाने के लिए दो दिनों के अंदर एक हजार शिक्षकों द्वारा आवेदन ईमेल करने की योजना है। जिसमें अन्य जिलों के शिक्षकों का भी सहयोग प्राप्त है। सरकार जल्द से जल्द अगर कारगर पहल नहीं करती है तो विवश होकर शिक्षकों को सरकार और सिस्टम के खिलाफ आवाज बुलंद करना पड़ेगा। जिसकी जिम्मेदारी सरकार की कार्यशैली होगी।


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