किशनगंज : बाढ़ का पानी जाते जाते छोड़ गया तबाही का मंज़र

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शशिकांत झा
वरीय उप संपादक

किशनगंज/बिहार : नेपाल और कौल कंकयी में आई उफान ने 24 घंटों के अंदर अपनी तबाही का मंजर छोड़ वापस चली गई । लोग रोते चिल्लाते रहे पर बाढ़ और उफान ने अपनी मनमानी से पूरे ईलाकों में कोहराम मचा दिया । सड़क,पुल-पुलिये और मकान धारासायी हुए या टूटकर बिखर गये ।

   किशनगंज जिले के दिघलबैंक, ठाकुरगंज, बहादुरगंज, कोचाधामन प्रखंडों में ऐसे दृश्यों को देखकर लोग सहज हीं सिहर उठते हैं। वह तो भला हो वर्षा रानी का जो बरसते-बरसते थम गई और सब कुछ गंवाकर भी लोगों ने राहत की सांसें ली। जब नदियों में आई उफान से कई गॉंवों में नदी की शक्ल लिए तेज पानी के बहाव ने मानों सब कुछ समेट कर चलते रहने का मन बना लिया था। पर उसी वक्त बरसात थम गई, धूप ने बादलों की जगहें ले ली और दो दिनों में पानी सूख गया। पर तस्वीरें अचानक आई बाढ़ से हुई तबाही के मंजरों की मिसालें कायम कर गई ।

अभी पिछले बाढ़ में हुई तबाहियों की भरपाई कौन कहे अब भी उसके निशान जमीं पर मौजूद थे। पुल पुलियों की दशाऐं ज्यों की त्यों बनी है, उस पर फिर से आई बाढ़ ने रही सही कसर भी पूरी कर दी। सड़कें उखड़ चुकी है, मकाने ढह गये, जमीन के नीचे बिछी केबुल-पाईप लाईनें बुरी तरह बिखरे पड़े हैं। जिसे अब ठीक होने में कितना समय लगेगा कहना मुश्किल है। जबकि कोरोना का कहर सातवें आसमान पर है, जिससे लोग यूं हीं डरे सहमें घरों में दुबके पड़े हैं। लॉकडाऊन में अब लोग दोहरी मार झेलकर भी “जान है तो जहान है” पर भरोसा कर जी रहे हैं। आगे क्या होगा भगवान हीं मालिक है।


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