मधेपुरा/बिहार : बिहार सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा 64 डिग्री कॉलेजों एवं बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष द्वारा 629 इन्टर कॉलेजों की मान्यता समाप्त करना बिहार में शिक्षा व्यवस्था को ठप करने जैसा निर्णय है। 40 वर्षों से स्थापित व संचालित इंटर कॉलेजों की मान्यता समाप्त करना ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ वाली कहावत को सच साबित करती है।
उक्त बातें मधेपुरा महाविद्यालय मधेपुरा के संस्थापक प्राचार्य डा अशोक कुमार ने शुक्रवार को महाविद्यालय परिसर में इंटर महाविद्यालय की संबद्धता समाप्त किए जाने को लेकर बैठक के दौरान कही। उन्होंने कहा कि जिन महाविद्यालयों की संबद्धता समाप्त कर दी गई है । उन महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षक एवं कर्मियों को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कृपा दृष्टि से वेतन का अंश मिलना प्रारंभ हुआ। शिक्षक एवं कर्मी पूर्ण वेतन व स्थायीकरण की आशा लिए थे और वर्तमान मुख्यमंत्री से बड़ी आशा पाले थे। लगता है लोक कल्याणकारी मुख्यमंत्री को यह सब पता नहीं है। तभी तो यह सब खेल हो रहा है।
डा अशोक कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री ने मधेपुरा प्रवास के दौरान स्वीकारते हुए कहा था कि अंश रूप वेतन के निर्णय में सुधार की जरूरत है, अर्थात पूर्ण वेतन होनी चाहिए. मुख्यमंत्री से आग्रह है कि स्वयं हस्तक्षेप करते हुए पुनः 64 डिग्री कॉलेजों तथा 629 इंटर कॉलेजों की मान्यता बहाल करते हुए सरकारीकरण की घोषणा की जाए, ताकि वेतन का जो अंश मिल रहा है, वह पूर्ण वेतन में तब्दील हो सके। ताकि इन शिक्षण संस्थाओं से जुड़े तमाम शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मियों के परिवार अब भी जीवन के अंतिम क्षण में बेहतरीन जिंदगी जी सकें। इस तरह के निर्णय से शिक्षा विभाग के साथ-साथ बिहार की बदनामी बिहार के बाहर हो रही है कि आखिर बिहार की व्यवस्था इस तरह क्यों हिल रही है। सरकार का निर्णय भी इन अफसरसाहों के कारण धरातल पर उत्तर नहीं पा रहे हैं, तभी तो विगत आठ वर्षों का अनुदान भी नहीं मिल पाया है। एक साथ सभी अनुदान की राशि मुहैया कराने का निर्णय भी साकार नहीं हो सका. उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा बीत गया, लगता है दीपावली व छठ में भी इन घरों में दीप न जलेगी, न छठ माता को अर्घ भी चढेगा। ईद और मोहर्रम भी यूं ही बीता। तब भी इस व्यवस्था को चलाने वाले की नींद न खुलना अपने आप में बड़ा अन्याय है। यह व्यवस्था कहीं ना कहीं सुशासन को बदनाम करने की साजिश लगती है।
सर्वे के अनुसार और भी शिक्षण संस्था की जरूरत है। इतनी संस्थाओं के बावजूद भी बच्चे नामांकन के लिए भटकते रहते हैं। आखिर किस मंशा से यह निर्णय लिया गया खोज का विषय है। त्वरित निर्णय से इस दोषपूर्ण निर्णय को वापस लेते हुए सभी अनुदान की राशि विमुक्त की जाए तथा पूर्ण वेतन अथवा सरकारी करण की घोषणा की जाए।
बैठक को इंटर कॉलेज महासंघ के प्रवक्ता प्रो अंजनी आजाद ने संबोधित किया. मौके पर डा अजीत कुमार, डा भगवान कुमार मिश्रा, प्रो अभय कुमार, प्रो मनोज भटनागर, प्रोफेसर भीम कुमार, प्रो सुबोध कुमार, प्रो गजेंद्र नारायण यादव, प्रो अनिल कुमार, प्रो लीला कुमारी, कुमारी किरण, नीलू कुमारी, रीना सिन्हा, प्रो विवेकानंद कुमार, विभाष कुमार, विजेंद्र मेहता, सोना जी, रंजीत कुमार, प्रो दिनेश प्रसाद, अमल किशोर यादव, मनोज कुमार, मिथिलेश कुमार, मंटू कुमार, चेतन आनंद, आनंद कुमार तथा सुमित कुमार यादव, योगेंद्र यादव, रामकुमार सहित अन्य लोग उपस्थित थे।