मधेपुरा/बिहार (प्रेस विज्ञप्ति) : डाॅ. रवि (जन्म 1943- निधन 2021) एक सुप्रसिद्ध विद्वान, स्वाभिमानी शिक्षक, कुशल प्रशासक, लोकप्रिय राजनेता एवं सहृदय इंसान थे। उन्होंने कोसी क्षेत्र के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वे एक तरह से आधुनिक कोसी के विश्वकर्मा थे। उक्त बातें डॉ. रवि विचार मंच के अध्यक्ष शंभू नारायण यादव ने कही।
वे शुक्रवार को राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) कार्यालय में आयोजित कोसी के विकास में डॉ. रवि का योगदान विषयक परिचर्चा की अध्यक्षता कर रहे थे। परिचर्चा का आयोजन पूर्व सांसद (लोकसभा एवं राज्यसभा) एवं बीएनएमयू, मधेपुरा के संस्थापक कुलपति प्रोफेसर डॉ. रमेन्द्र कुमार यादव रवि की जयंती की पूर्व संध्या पर डॉ. रवि विचार मंच के तत्वावधान में किया गया।
उन्होंने कहा कि बताया कि डॉ. रवि के प्रयास से ही सन् 1981 में मधेपुरा को जिला का दर्जा मिला। कोसी क्षेत्र में सड़कों का जाल बिछा और सन् 1992 में भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय की स्थापना हुई।
डॉ. रवि का राजनीति में था विशिष्ट स्थान
उन्होंने कहा कि डॉ. रवि का प्रदेश एवं देश की राजनीति में एक विशिष्ट स्थान था। उन्होंने राजनीति की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से की थी।बाद में वे जनता दल से रिकार्ड मतों से संसद में पहुंचे। वे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी, पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव एवं वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अत्यंत करीबी रहे।
हमेशा दिलों में जिंदा रहेंगी डॉ. रवि की स्मृतियां
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डीएसडब्ल्यू प्रो. अशोक कुमार ने कहा कि डॉ. रवि हमारे प्रेरणास्रोत हैं। उनकी स्मृतियां हमारे दिलों में हमेशा ताजी रहेंगी। उन्होंने महज छ: माह के कार्यालय में विश्वविद्यालय के विकास की मजबूत आधारशिला रखी।
उन्होंने बताया कि डॉ. रवि पार्वती विज्ञान महाविद्यालय के शाही निकाय के अध्यक्ष भी थे। वे ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय के प्रथम कमीशंड प्रधानाचार्य रहे और प्रधानाचार्य के रूप में ही विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति बने।
एक लोकप्रिय शिक्षक थे डॉ. रवि
ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा के प्रधानाचार्य प्रो. कैलाश प्रसाद यादव ने कहा कि डॉ. रवि एक लोकप्रिय शिक्षक थे। जब वे अपनी हिंदी कक्षा में लयबद्ध होकर दिनकर के प्रबंध काव्य रश्मिरथी का पाठ करते थे, तो दूसरे विषयों के विद्यार्थी भी उसे सुनने आ जाते थे।
उन्होंने कहा कि डॉ. रवि साहित्यिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में अत्यधिक सक्रिय थे। वे बुद्धिजीवी विचार मंच के अध्यक्ष, राष्ट्र भाषा परिषद् के सदस्य, बिहार मैथिली अकादमी के सदस्य, सदस्य, राज्य भाषा समिति के सदस्य एवं हिन्दी साहित्य सम्मेलन, मधेपुरा के अध्यक्ष रहे। उन्होंने कई पुस्तकों की रचना की है, जो विभिन्न पाठ्यक्रमों में भी शामिल हैं।
प्रतिमा-निर्माण कार्य होगा शुरू
कार्यक्रम का संचालन करते हुए समन्वयक डॉ. सुधांशु शेखर ने बताया कि डॉ. रवि विचार मंच का उद्देश्य डॉ. रवि के विचारों एवं कार्यों का प्रचार-प्रसार करना है।मंच के प्रयास से विश्वविद्यालय में डॉ. रवि की आदमकद प्रतिमा हेतु स्थल का शिलान्यास कुलपति प्रो. बी. एस. झा के कर-कमलों से हो चुका है। आने वाले दिनों में प्रतिमा-निर्माण का कार्य शुरू कराया जाएगा।
इस अवसर पर क्रीड़ा एवं सांस्कृतिक परिषद के निदेशक प्रो. मो. अबुल फजल, एम. एड. विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सी. डी. यादव, बीएड विभागाध्यक्ष डॉ. सुशील कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर माधुरी कुमारी, डॉ. अंजू प्रभा, डॉ. रूपा कुमारी, संतोष कुमार आदि उपस्थित थे।

