मधेपुरा : आशा कर्मियों ने किया समाहरणालय का घेराव, जिला पदाधिकारी को सौंपा मांग-पत्र

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अमित कुमार
उप संपादक

मधेपुरा/बिहार : जिले की आशा कर्मियों ने मंगलवार को 11 वे दिन समाहरणालय का घेराव किया तथा सरकार एवं जिला प्रशासन के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की। इस दौरान आशा ने समाहरणालय के सामने मुख्य सड़क को घंटों जाम रखा। आशा ने बिहार सरकार से अविलंब उनकी मांगों पर विचार करने की अपील की।
बावजूद सरकार उनकी मांगों अगर गंभीरतापूर्वक विचार नहीं करती है तो हड़ताल की अवधि बढायी जायेगी। मांगों में 29 जून 2015 समझोता के मानदेय ही निर्धारण सहित अन्य आंकड़े भी बिंदु को लागू किया जाए। आशा कार्यकर्ताओं को सरकारी सेवक घोषित किया जाए और ऐसा किए जाने पर न्यूनतम 18 हजार मासिक मानदेय लागू किया जाए, साथ ही आशा फैसिलिटेटर को तदुनुरुप समानुपातिक उच्चतर मानदेय भुगतान किया जाए, योग्यता धारी आशा के नर्सिंग ट्रेनिंग के लिए स्कूलों में 50 प्रतिशत आरक्षित किया जाय, प्रशिक्षण रोनक आशा कार्य अभी वर्ष तक उम्र सीमा में छूट देते हुए एएनएम के पद पर पदस्थापन किया जाय, योग्यता धारी फैसिलिटेट्रो के प्रखंड सामुदायिक समन्वयक (बीसीएम) के 50 प्रतिशत पदों को नियुक्ति/पदस्थापन स्थापन किया जाय, चौथे चरण का आशा प्रशिक्षण के साथ ही शेष बची हुई और नवनियुक्त आशा का प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाए, आशा द्वारा निबंधित प्रसूति को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लाए जाने के बाद अन्य अस्पतालों में प्रसव हेतु रेफर किए जाने की स्थिति में संबंधित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से आशा को देय प्रोत्साहन राशि भुगतान सुनिश्चित किया जाए, आशा को गाइडलाइन के अनुसार ब्रे प्रोत्साहन राशि का बकाया सहित अद्यतन भुगतान किया जाए, उच्च स्तरीय समिति की सेवा अवधि सेवा शर्त मासिक मानदेय सहित समस्त अनुशंसाओं का लाभ आशा तथा आशा फैसिलिटेटर को स्वीकृत किया जाय, आशा तथा फैसिलिटेटर को सभी प्रकार के सामाजिक सुरक्षा ईपीएफ, ईएसआई राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा आदि से आच्छादित किया जाए, सभी आशाओं को बीपीएल सूची में शामिल करते हुए स्थानीय जन वितरण प्रणाली दुकानों से सस्ते दर पर प्रतिमाह पर 30 किलो अनाज खाद्यान वितरण तथा अन्य सामग्रियों के आपूर्ति सुनिश्चित किया जाए,  आशा कर्मी के साथ चिकित्सक अथवा चिकित्सा कर्मियों द्वारा दुव्यवहार अमर्यादित व्यवहार पर सख्ती से रोक लगाया जाए, साथ ही ऐसे आरोपियों के विरूद्ध तत्परता पूर्वक दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित किया जाय, आशाओं को व्हाट्सएप टीकाकरण एवं अन्य मद की राशि पर पारदर्शी विवरण के साथ फरमा समय भुगतान सुनिश्चित किया जाए और इसमें व्यापक भ्रष्टाचार तथा धांधली पर सख्ती से रोक लगाया जाय, आशाओं की मासिक बैठक नियमित रूप से आयोजित किया जाए और आशाओं को यात्रा वन का समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए, आशा फैसिलिटेटर को अप्रैल 2018 से पाांच सौ रूपया तथा अक्टूबर 2018 से छह हजार रूपया मासिक यात्रा भत्ता ससमय भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

प्रदर्शन के बाद आशा प्रतिनिधिमंडल ने जिला पदाधिकारी को मांग पत्र सौंपा।

घेराव के दौरान जिला एवं सभी प्रखड के सभी आशा कार्यकर्ता जिला मंत्री रेणु कुमारी एवं अन्य आशा कर्मी दिपीका सिंह, विजया लक्ष्मी, बेबी ठाकुर, बबीता देवी, पूनम कुमारी, रेनू देवी, मुंगिया देवी, मनोरमा रानी, अरूणा देवी, भाग्यशाली देवी, अंजू देवी, संजू देवी ,संजू कुमारी, रामवती देवी, प्रमिला देवी, रेखा कुमारी, नीतू देवी, बिंदू देवी, द्रोपति कुमारी, कविता देवी, मंजू देवी, बबीता देवी, रीना देवी, मीणा देवी, आशा देवी, रिंकी देवी अन्य आशाकर्मी मौजूद थी।

आशा कर्मियों ने 12 सूत्री मांग को लेकर सड़क को घंटो जाम रखा। वाहन तो दूर पैदल भी लोगों को उस होकर गुजरने नहीं दिया गया। इस जाम के दौरान कई स्कूली बच्चे अभिभावक एवं न्यायालय जाने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। काफी लोगों को इस जाम के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ा। आशा कर्मियों के द्वारा कई लोगों के साथ धक्का-मुक्की भी की गई। वहीं समाहरणालय जाने वाले लोगों को भी काफी परेशानियां उठानी पड़ी।


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