विश्वविद्यालय की उदासीनता के खिलाफ आक्रोश चरम पर, अर्थी जुलूस निकाल जताया विरोध

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मधेपुरा/बिहार : लंबे समय से कुछ गम्भीर मांगों को लेकर बीएनएमयू में क्रमबद्ध आंदोलन के कड़ी में शनिवार को अर्थी जुलूस निकाल छात्र संगठन एआईएसएफ,युवा संगठन एआईवाईएफ ने विश्वविद्यालय की मनमानी व लचर व्यवस्था के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया।

एआईएसएफ के राज्य परिषद् सदस्य सौरव कुमार और एआईवाईएफ के जिलाध्यक्ष मुन्ना कुमार के नेतृत्व में आयोजित विरोध प्रदर्शन में छात्र युवा संगठन के कार्यकर्ता बीएनएमयू मुख्य द्वार से अर्थी जुलूस निकाल विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ “राम राम सत्य है, विश्वविद्यालय का यही गत है” दोषी पदाधिकारी मुर्दाबाद,लचर व्यवस्था मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए छात्र कल्याण पदाधिकारी, कुलसचिव, प्रोफेसर इंचार्ज, बीएड, एमएड के हेड के कार्यालय के सामने से होते हुए शिक्षा शास्त्र विभाग के के सामने अर्थी को आग के हवाले किया।

इस मौके पर वाम छात्र संगठन एआईएसएफ के बीएनएमयू प्रभारी हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने विश्वविद्यालय के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि लगभग आठ नौ माह तक मांग- पत्र पर पत्र दे छात्रहित में पहल की मांग की लेकिन विश्वविद्यालय के उदासीन रवैया के खिलाफ विवश होकर आंदोलन का आगाज करना पड़ा। मनमानी का आलम यह है कि उग्र आंदोलन के बाद भी विश्वविद्यालय पहल करता नजर नहीं आ रहा है, मुख्यालय के एमएड फर्स्ट सेमेस्टर में अटेंडेंस नहीं बनना, गर्ल्स हॉस्टल का शुरू नहीं होना, विवि का जर्नल प्रकाशित नहीं होना, स्थापना के तीन दशक बाद भी एकेडमिक बिंदुओं पर बैठक नहीं होना, शिक्षा शास्त्र विभाग में शुरू से शिक्षक कर्मचारियों के घोर कमी को दूर नहीं करना आदि इसका प्रमाण है,   जिससे आंदोलन और उग्र होने की संभावना है। बीएनएमयू के लगातार गिर रही रैंकिंग पर मंथन पर पहल नहीं होने को निराशाजनक बताया।

एआईवाईएफ के राष्ट्रीय परिषद् सदस्य शम्भु क्रांति ने इस अवसर पर कहा कि लगातार लोकतांत्रिक तरीके से पहल की मांग के बाद भी विश्वविद्यालय कुमहकर्णी निद्रा में सोई है, यहां हर एक कदम विश्वविद्यालय को बढ़ाने के लिए आंदोलन का धक्का देना पड़ता है। छात्रहित में लगातार सक्रिय कुलपति को कुछ पदाधिकारियों की मनमानी से बदनामी झेलना पड़ा है। प्रोफेसर इंचार्ज, बीएड, एम एड के हेड की मनमानी विश्वविद्यालय को कलंकित करने का काम कर रही है। ऐसे पदाधिकारियों पर नकेल कसने की जरूरत है। अगर विश्वविद्यालय समय रहते पहल नहीं करेगा तो आंदोलन अंदर और बाहर दोनों उग्र रूप में बढ़ेगा जिसकी पूरी जवाबदेही बीएनएमयू प्रशासन की होगी।

कार्यक्रम का नेतृत्व करते हुए छात्र नेता सौरव कुमार और युवा नेता मुन्ना कुमार ने कहा कि यह आंदोलन दर्शा रहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन सच में मृतप्राय हो चुकी है। वरना इतनी गतिविधियों के बाद भी मौनी बाबा नहीं बनती। समय रहते अगर विश्वविद्यालय होश में नहीं आई तो अर्थी जुलूस के बाद श्राद्ध कर्म, धरना और अनशन के लिए भी संगठन तैयार है।

इस अवसर पर पूर्व छात्र नेता दिलीप कुमार अतुल, मनदीप, शहंशाह, रौशन, गुड्डू, लक्ष्मण, कृष्णकांत, राहुल, मुकेश आदि ने कहा कि इतने आंदोलन के बाद भी पहल नहीं करना यह साफ करता है कि विश्वविद्यालय में हठधर्मिता उफान पर है, इसे दूर करने के लिए संगठन संकल्पित है।

अमित कुमार अंशु
उप संपादक

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