13 वर्ष बाद भी नहीं भरा कुसहा त्रासदी का जख्म

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रियाज खान
संवाददाता
छातापूर/सुपौल

छातापुर/सुपौल/बिहार : 2008 में आए कुसहा त्रासदी से छातापुर क्षेत्र के लोग 13 वर्ष बाद भी नहीं उबर पाए हैं। त्रासदी के दौरान क्षतिग्रस्त हुए कई पुल-पुलियों के स्थान पर अब तक नए पुल का निर्माण नहीं किया जा सका है। जिस कारण क्षेत्र के लोगों की परेशानी अब तक बरकरार है।

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 मालूम हो कि 18 अगस्त 2008 को कुसहा बांध टूटा था, इस प्रलयकारी बाढ़ ने सुपौल, मधेपुरा समेत पांच जिलों में जी भर कर तबाही मचाई थी। जान और माल की क्षति को देखते हुए सरकार इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित किया गया था। सरकार ने पहले से बेहतर कोसी बनाना का वादा कर लोगाें के जख्मों पर मरहम लगाने का वादा किया और काम भी किया। लेकिन जमीन सच्चाई यह है कि जिन-जिन जगहों पर काम अबतक पूरे नहीं हुए, वहां के लोगों के जख्म अब भी हरे हैं और साल दर साल गहरे भी हो रहे हैं।

इसी कड़ी में छातापुर प्रखंड क्षेत्र के माधोपुर पंचायत के हरिहरपुर गाँव के वार्ड नंबर 12 व 14 के बीच बनी सड़क और पुल कुसहा त्रासदी में धवस्त हो गया था, यह सड़क वार्ड नंबर 11और 15 से होते हुए रामपुर पंचायत को जोड़ती है । महज एक किलोमीटर दूरी पर महद्दीपुर बाजार है । पुल व सड़क नहीं होने के कारण आमलोगों को तीन से चार किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। इस गाँव के बच्चों को हाईस्कूल जाने मे भी काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है । खासकर इस वार्ड के लोगों को बरसात के मौसम में काफी परेशानी होती है। लोगों ने बताया कि लगभग पांच सौ मीटर सड़क टूटा हुआ है, जो जानलेवा गढ्ढा बनी हुई है। बरसात के समय में पूरे सड़क पानी से लबालब रहता है, पैदल चलने लायक भी नहीं रहता है ।

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 बताया कि प्रखंड मुख्यालय और स्वास्थ्य केन्द्र तक जाने के लिए भी काफी परेशानी होती है। खासकर बरसात के दिनों में बच्चों की पढ़ाई करने में काफी परेशानी होती है। स्थानीय ग्रामीण ने बताया कि ध्वस्त सड़क और पुल निर्माण को लेकर कई बार सांसद, विधायक और वरीय पदाधिकारियों के पास गुहार लगाई गई। लेकिन आज तक सिर्फ आश्वासन दिया गया है। आक्रशित लोगों ने बताया कि वर्षों से इस क्षेत्र के लोगों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।


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