मधेपुरा : कोरोना के कारण इस साल नहीं मानेगा उर्स, अकीदातमंदों में मायूसी

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चौसा से संवाददाता नौशाद आलम की रिपोर्ट :

चौसा/मधेपुरा/बिहार :  मधेपुरा जिला के चौसा प्रखंड अंतर्गत पैना पंचायत के चंदा गांव में 23 जून को प्रसिद्ध पीर हजरत अली जान शाह रहमतुल्लाह अलैह का 80वां उर्स इस साल धूमधाम से नहीं मानाया जाएगा, कोरोना महामारी के कारण सादगी पूर्ण तरीके से सिर्फ चादरपोशी कर रस्म अदा की जाएगी। मालूम हो कि हजरत अलीजान शाह का सालाना उर्स एक उर्दू तारीख खाली(जिल काअदह) महीने में मनाया जाता है।  उर्स के मौके पर आयोजित एक दिवसीय जलसा में बड़े बड़े खतीब व शायर शिरकत करते हैं, लेकिन कोरोना महामारी के कारां इस साल वह रौनक अकीदातमंदों को देखने को नहीं मिलेगी

इस संबंध में उर्स कमेटी के सदर मौलाना बदरुजमा फैजी ने बताया कि इस बार उर्से पाक के मौके पर कोरोना को लेकर बेहद सादगी पूर्ण तरीके से सिर्फ चादरपोशी कर उर्स की रस्म अदा की जाएगी। हाजी अब्दुल हमीद ने अलीजान शाह की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अलीजान शाह भागलपुर जिला के बिहपुर थाना अंतर्गत झंडापुर के निवासी थे, जो चंदा आकर बस गए।  एक बार की कहावत है कि हजरत अलीजान शाह का भैंस किसी दूसरे के खेत में जाकर उसकी फसल को खा लिया था तो 2 दिन तक उस भैंस का दूध उस खेत वाले को दे दिए थे। वहीं एक बार गांव में बहुत भयंकर डायरिया का प्रकोप हो गया था, जिसे लोग व माल मवेशी तबाह हो गए थे, हजरत ने लोगों को इस बीमारी ने निजात दिलाने के लिए दुआ की जिसके बाद गांव में खुशहाली आई थी।  ऐसे बहुत से हजरत अलीजान शाह के करामात हैं।  हजरत अलीजान साह के दरबार में हिन्दू मुस्लिम एकता भी देखने को मिलती है।

उर्स के मौके पर हिन्दू समुदाय के लोग भी मन्नत पूरी होने पर चादरपोशी करते है और जलसे में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं और साथ ही प्रशासन का भी भरपूर सहयोग होता है।


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