पूर्णिया ब्रेकिंग : बालिका गृह में यौन उत्पीड़न जारी-पीड़ित बच्चियों ने सांसद पप्पू यादव से मिलकर सुनाई आपबीती

अमित कुमार
उप संपादक

बिहार में बहार है -नीतीशे कुमार है ‘ का नारा अब फीका पड़ चुका है । अब तो ‘ बिहार में बलात्कार है – क्योंकि नीतीशे कुमार है ” जैसे नारे गूंजने लगे हैं। क्योंकि बिहार में सुशासन की धार इतना भोथा पड़ चुका है कि एक के बाद एक बलात्कार की घटनाएं सामने आ रही हैं । हत्याओं पर हत्याएं हो रहीं हैं । लेकिन सरकार बेबस है। बेबसी का यह आलम है कि उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी कार्रवाई करने के बजाय अपराधियों के आगे हाथ जोड़कर अपराध न करने की शर्मनाक अपील कर रहे हैं । भय और आतंक के माहौल में बड़ी शर्मनाक खबर पूर्णिया से आ रही है । पूर्णिया बालिका गृह में अनाथ बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न का मामला प्रकाश में आया है ।

सनद रहे कि बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह में हुए बालिकाओं के साथ यौन उत्पीड़न का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि पूर्णिया बालिका गृह के मामले ने झकझोर डाला है। गुरुवार को जिला मुख्यालय स्थित अतिथि गृह में मधेपुरा सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के द्वारा जन शिकायतें सुनी जा रही थी। तभी चेहरे को ढके कुछ बच्चियां सांसद के पास आकर फफक – फफक कर रोने लगी। सांसद के द्वारा उनसे बात करने पर पता चला कि पूर्णिया बालिका गृह में बालिकाओं के साथ दर्दनाक अमानवीय व्यवहार किया जाता है। जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता है। पूर्णिया बालिका गृह से छूटी लड़कियों ने जब उनके साथ हुए कुकृत्य की दास्तान सुनाई तो वहां खड़े सभी लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। अपने ऊपर बीती यातनाओं को सुनाते -सुनाते उन लड़कियों की आंखों से आंसू रुक नहीं रहे थे। कहते हैं बेसहारा, अनाथ लड़कियों के लिए तो बालिका गृह स्वर्ग के समान होता है। मगर बिहार के बालिका गृहों ने तो बालिकाओं का भरोसा ही तोड़ दिया है।
किसी व्यक्ति के साथ अगर एक आपदा आ जाए तो वह सहन नहीं कर पाता है। लेकिन इन बच्चियों के साथ तो आपदाओं का सिलसिला जारी है।

सहरसा जिले के सौर बाजार प्रखंड के एक खुशहाल परिवार में वर्ष 2008 में प्रकृति ने जो खेल खेला उसे एक हंसता खेलता परिवार उजड़ गया। इन दर्द की सिसकियां अभी बंद भी नहीं हुई थी कि मानवीय खेल ने इन लोगों को कहीं का नहीं छोड़ा। वर्ष 2008 में आई भीषण बाढ़ में सहरसा जिले के सौर बाजार में एक पति पत्नी पानी में बह गए। उन दोनों के मौत के बाद उनके तीन बेटी, दो बेटा एवं बूढ़ी मां जैसे अनाथ सी हो गई। उन पांचो बच्चों की दादी ने कुछ दिनों तक तो पालन पोषण किया, लेकिन कुछ दिन के बाद उनकी भी हिम्मत टूट गई और विवश होकर सहरसा जिला स्थित आकांक्षा अनाथ आश्रम में डाल दिया। जहां से उन लोगों की नई जिंदगी की शुरुआत हो गई। वे लोग खुश भी थे, क्योंकि अनाथ आश्रम संचालक दंपति उन लोगों का भरण पोषण करने लगे। भरण पोषण के साथ साथ उन लोगों की पढ़ाई लिखाई भी चलने लगी।
पूर्णिया बालिका गृह से छुटी बच्चियों ने बताया कि सहरसा आकांक्षा अनाथ आश्रम में अच्छे दिन चल रहे थे। अचानक 17 सितंबर 2017 को सहरसा जिला प्रशासन के द्वारा जबरन एक ही दिन में स्वर्ग से उठाकर नर्क में धकेल दिया गया। सहरसा अनाथ आश्रम से उन तीनों बहनों के साथ नौ और लड़कियों को बालिका गृह पूर्णिया भेज दिया गया। वहीं उनके दो भाईयों और चार लड़कों को बाल गृह सहरसा में दे दिया गया। जहां से उन लड़कियों की बुरे दिनों की पुनः शुरुआत हो गई। बच्चियों ने बताया कि पूर्णिया बालिका गृह में कुछ दिन गुजरने के बाद सहरसा की पदाधिकारी भास्कर कश्यप और भास्कर प्रियदर्शी बालिका गृह पूर्णिया पहुंचे और सहरसा अनाथ आश्रम से आई सभी लड़कियों को बारी-बारी से बंद कमरे में मेडिकल जांच के बहाने दुष्कर्म करने लगे। जब उन लोगों ने इसका विरोध किया तो भास्कर कश्यप और भास्कर प्रियदर्शी ने उन बच्चियों को जान से मारने की धमकी देने लगे। डर से सहमी बेबस बच्चियों के साथ उन लोगों ने बारी बारी से कुकृत्य करते रहे और उनके कुकृत्य को बच्चियां झेलती रही। बाद में जब इसकी शिकायत बच्चियों ने बालिका गृह अधीक्षिका संध्या कुमारी से किया तो उन्होंने नजरअंदाज करते हुए कहा कि अभी तुम लोग नई नई आई हो। यहां यह सब होता रहता है। साथ ही उन्होंने कहा कि यहां जो हो रहा है, इसके बारे में किसी को नहीं बताना, नहीं तो जान से मारे जाओगे। उन लोगों के डर से सभी बच्चियां आधे पेट, अधपका, जला खाना खाकर सांस बचाती रही। बच्चों ने बताया कि कई बार तो उन लोगों ने आत्महत्या करने की भी सोची, मगर उन बच्चियों को मौत भी नसीब नहीं हुई। कई बार उन लोगों ने उस काल कोठरी या यातना गृह से भागने की भी कोशिश की, मगर उसमें भी सफलता हासिल नहीं मिली ।

वहीं बाल गृह सहरसा में उनके भाई अभिनंदन कुमार और हरी ओम के साथ भी मारपीट, प्रताड़ना एवं खाने की किल्लत के साथ जिंदगी कट रही थी। साथ ही उनकी दो बड़ी बहन जो आकांक्षा अनाथ आश्रम में रहती थी भास्कर कश्यप एवं भास्कर प्रियदर्शी के डर से दादी के पास चली गई। जहां ग्रामीणों के सहयोग से कम उम्र में ही शादी कर दी गई। बच्चों ने बताया कि एक दिन पूर्णिया बालिका गृह में अधिकारियों के द्वारा निरीक्षण किया जा रहा था। जिनके पास बच्चों ने बालिका गृह के कुकृत्य के बारे में जानकारी देने पहुंची। जहां अधीक्षिका संध्या कुमारी ने उन्हें जबरन एकांत में ले जाकर कुछ भी बताने से मना किया और कहा कि अगर उन्होंने कुछ भी बताया तो जान से मार दिया जाएगा। जिसके बाद भास्कर कश्यप और भास्कर प्रियदर्शी ने उन बच्चियों को वहां से उठा कर उनकी दादी के पास छोड़ आए और उन्होंने किसी भी अधिकारी के पास ना जाने की धमकी दी।

पूर्णिया यातना गृह (बालिका गृह) के यातनाओं से निकली बच्चियों ने बताया कि उनके साथ होने वाली तमाम घटनाओं को उन लोगों ने कई बार हिम्मत बांध कर अधिकारियों के पास रखने की कोशिश की और कई बार तो सहरसा गई थी मगर भास्कर प्रियदर्शी और भास्कर कश्यप के द्वारा हर बार उन्हें डरा धमका कर मौत की धमकी देकर हिम्मत तोड़ देते थे। लेकिन गुरुवार को सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के मधेपुरा आगमन की बात सुनकर चोरी छुपे, चेहरे को ढके मधेपुरा की अतिथि गृह पहुंची। जहां उन लोगों ने अपनी आपबीती सांसद को सुनाई। बच्चियों ने बताया कि पूर्णिया बालिका गृह में उनके साथ साथ कई और लड़कियां रहती हैं। जिनके साथ भी यही सब रोजाना गुजरता है। उनमें से एक लड़की बालिका गृह के कुव्यवस्था के कारण जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है। वहीं एक लड़की तो बिना अपनी मर्जी की मां भी बन गई और उसके बच्चे को जबरन मोटी रकम लेकर बेच दिया गया। बच्चों ने इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय पटना को भी पत्र लिखा है। मुख्य न्यायाधीश को दिए गए पत्र में बच्चियों ने अपने साथ साथ पूर्णिया बालिका गृह में रह रही और लड़कियों के साथ इंसाफ की मांग की है।

बहरहाल पूर्णिया बालिका गृह में चल रहे कुकृत्य के सामने आने से बिहार पुनः शर्मशार हुआ है । बिहार की बेटियों की लरजती आत्मा और गुंजती चीख ने मानवता को झकझोर कर रख दिया है । बावजूद इसके सरकार शर्मनाक नींद सो रही ।

वहीँ सासंद पप्पू यादव ने मामले को गंभीरतापूर्वक लेते हुए इस मामले को मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड के साथ ही सीबीआई से  जाँच कराने की मांग सरकार से की है।

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